जबरदस्त राजनीतिक खींचतान के चलते रोचक होने जा रहे बिहार विधानसभा के चुनावों में हर किसी की निगाह इन सात धुरंधरों खिलाड़ियों पर टिकी रहेगी। आप भी जानिए क्यों खास हैं ये सात खिलाड़ी।
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PICS: ये सात तय करेंगे बिहार चुनावों की तकदीर
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बिहार की राजनीति में डेढ़ दशक तक राज करने वाले लालू यादव आज भी प्रदेश की राजनीति की धुरी हैं। जीवन के 67 बसंत देख चुके लालू एक बार फिर दोस्त से दुश्मन और दुश्मन से फिर दोस्त बने नीतीश के साथ एक अलग तरह की राजनीतिक जुगलबंदी लेकर सामने हैं। लालू को आज भी यादव वोटों का सबसे बड़ा खेवनहार माना जाता है।
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बिहार में सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों की कतार में सबसे आगे खड़े 64 साल के नीतीश कुमार को बिहार को विकास के रास्ते पर ले जाने का श्रेय जाता है। लेकिन इस बार चौतरफा घिरते दिख रहे नीतीश अगर अपने चेहरे के दम पर मतदाताओं को रिझाने में कामयाब रहे तो महागठबंधन की किस्मत खुल सकती है।
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लगभग सात साल तक बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की गिनती प्रदेश भाजपा के बड़े नेता में होती है। उनके कद का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि केन्द्र में भाजपा की जीत के बाद उन्हें भाजपा अध्यक्ष बनाने की बात भी चली थी लेकिन बिहार चुनावों में उनकी भूमिका को देखते हुए मामला टल गया। 63 साल के सुशील मोदी का निर्विवादित चेहरा वोटरों के सामने एक अच्छे विकल्प के रूप में सामने आ सकता है।
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सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज करके वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया राम विलास पासवान बिहार की राजनीति में खासी अहमियत रखते हैं। 69 साल के पासवान को दलितों का बड़ा नेता माना जाता है। बिहार चुनाव में अगर वो दलितों को गोलबंद करने में सफल रहे तो राजग की किस्मत पलट सकती है।
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दो साल पहले तक बिहार की राजनीति में अंजाना नाम रहे जीतन राम मांझी आज राजनीतिक के बड़े खिलाड़ी बन चुके हैं। नीतीश के खिलाफ भाजपा 70 साल के मांझी को तुरुप के इक्के की तरह इस्तेमाल कर सकती है। बिहार के आठ फीसदी महा दलित वोटरों की चाबी काफी हद तक जीतन राम मांझी के हाथ में ही है।
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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा लोकसभा चुनावों में भाजपा के साथ गठबंधन कर बिहार की राजनीति में अपनी जगह मजबूत कर चुके हैं। बिहार की पिछड़ी जातियों में कुशवाहों की अच्छी खासी तादाद होने के कारण उपेन्द्र कुशवाहा भी कई सीटों का समीकरण बदलने की ताकत रखते हैं।
बिहार की राजनीति में सबसे नया और सनसनीखेज नाम है एमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैशी का। हैदराबाद का यह 46 साल का सांसद देशभर में मुस्लिमों को गोलबंद करने में लगा हुआ है। महाराष्ट्र चुनावों में अत्प्रत्यशित सफलता पाने वाले असुद्दीन ओवैशी ने अगर बिहार चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे तो लालू नीतीश के महागठबंधन को बड़ा झटका लग सकता है।