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कैसे पड़े इन 10 नामी कपंनियों के इतने अनोखे नाम, यहां जानिए

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इन नामी कंपनियों के नामों के पीछे की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। ऐसा नहीं है कि मन में आया और कोई भी नाम रख दिया। जानिए दुनिया पर राज करने वाली इन कंपनियों को कैसे मिला इनका नाम।
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गूगल का नाम googol से पड़ा जो कि नंबर 1 का गणित नाम है और उसके आगे 100 शून्य लगे होते हैं।
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कैमरे का ब्रांड कैनन का असली नाम क्वानन था जो कि एक बौद्ध देवी हैं। 1935 में इसे बदल कर कैनन कर दिया गया।

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पेप्सी का नाम 1898 में रखा गया। ये डिसपेपसिया शब्द से बना है जिसका मतलब होता है अपच। इसके निर्माता ने इसलिए यह नाम रखा क्योंकि उनका मानना था कि पेप्सी पाचन सही करने वाली सेहतमंद कोला पेय है।
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रीबॉक (reebok) की दूसरी स्पेलिंग (rhebok) है। यह अफ्रीकी-डच शब्द है जो एक तरह के हिरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह नाम रफ्तार और शोभा का प्रतीक है।

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याहू का फुलफॉर्म है येट अनदर हेरारिकल ऑफिशियस ओरेकल। साथ ही लेखक जोनाथन स्विफ्ट ने अपनी किताब गुलीवर्स ट्रैवल्स में भी अपने मन से एक शैतान, चीखने वाली, बद्तमीज प्रजाती का नाम याहू रखा था।
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अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस चाहते थे कि कंपनी का नाम अंग्रेजी लेटर ए(a) से हो ताकि जब ढूंढा जाए तो वह ऊपर ही दिखे। उन्होंने सोचा कि दुनिया की सबसे बड़ी नदी अमेजन से अच्छा और क्या नाम हो सकता है इसलिए रख दिया। अमेजन के लोगो में जो a से z तक एक तीर जाते देखते हैं इसका असल में मतलब है ए टू जेड यानी जहां सब कुछ मिले।

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ओरैकल दरअसल एक प्रोजेक्ट के कोड की तरह इस्तेमाल किया जाता था जिसे इसके फाउंड लैरी ऐलिसन और बॉब ओट्स ने बनाया था जब वे अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (cia) के लिए काम कर रहे थे। यह एक डाटाबेस था जिसका काम था हर उस चीज का उत्तर देना जो पूछा जाए।

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स्काईप का पहले नाम स्काई पीयर टू पीयर था। इसका मतलब हुआ दोस्त से दोस्त तक आसमानी सिग्नल के जरिए। बाद में इसका नाम स्काइपर हुआ और फिर बाद में पीछे से आर (r) भी हटा दिया गया।

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सोनी दरअसल सोनस से बना है जो कि लैटिन शब्द है। यह एक तरीका है सॉनी ब्यॉय बोलने का3 जिसका जापानी मतलब होता है स्मार्ट जवां आदमी।
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ब्लैकबेरी एक फल का अंग्रेजी नाम है और कंपनी ने इसलिए यह नाम चुना क्योंकि उन्हें फोन के बटन ब्लैकबेरी फल के ऊपर जो दाने होते हैं, उसकी तरह लगे। यह 1999 में रखा गया था।
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