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सुसाइड ही नहीं, उससे उबरना भी होता है उतना ही कठिन, तस्वीरें हैं गवाह

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इस फोटो-स्टोरी के माध्यम से मिलिए लॉरा हॉसपोस से। लॉरा वो लड़की हैं जो फोटोग्राफी पढ़ती हैं।     सभी तस्वीरें बोर्डपांडा से।
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सुसाइड ही नहीं, उससे उबरना भी होता है उतना ही कठिन, तस्वीरें हैं गवाह

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लॉरा हमेशा से एक ईटिंग डिस्‍ऑर्डर से ग्रसित थीं। खाने की वजह उनके लिए तनाव का कारण बना। इस वजह से वो कई बार तनाव और उपजने वाली सुसाइड के मानसिकता के काफी बार रूबरू हो चुकी हैं।

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लॉरा को एक वक्त लगने लगा था कि अब वो दिमागी रूप से फिट हैं , पर बहुत जल्द ही एहसास हुआ कि ऐसा नहीं है और वो नकली सा जी रहीं। अंदर से वो इतने तनाव में थे कि खुद को खत्म कर देने के करीब थी।

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ऐसे में एक दिन जब वो सोई और बाद में उठी और खुद को एक सायकायट्रिक सेक्‍शन में पाया।
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वहां उनका जब इलाज चल रहा था , तो तनाव और सुसाइड की मानसिकता से बाहर आने के ‌लिए उन्होंने अपने कैमरे का सहारा लिया।
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वहां उनका जब इलाज चल रहा था , तो तनाव और सुसाइड की मानसिकता से बाहर आने के ‌लिए उन्होंने अपने कैमरे का सहारा लिया।
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अस्पताल के अंदर उन्हें कैमरा रखने नहीं दिया गया। लेकिन अपने ब्वॉयफ्रेंड की मदद से वो एक फोन कैमरा जुटा पाने में कामयाब हो पाई।

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इसके बाद उन्होंने अपना ही एक सेल्फ पोर्टरेट सेशन किया। उन्होंने कैमरे के इस्तेमाल से हर बार तस्वीरें तब जी जब वो काफी तनाव महसूस कर रही होती थीं।

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उन्होंने तस्वीरों के माध्यम से बताया कि दिमाग में सुसाइड ना करने और उभरने भी कठिन होता है।कई बार खुद से उलझना होता है, रोना होता है फिर सकारात्मक होना पड़ता है। कैमरे ने जैसे उन्हें राहत दी। खुद की तस्वीरें लेकर और बाद में धीमे-धीमे खुद को बेहतर देखकर उन्हें अच्छा लग रहा था।अब वो ठीक हो रही हैं और कैमरे को ही इसका सबसे बड़ी वजह मानती हैं।
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