भारत का एक बड़ा हिस्सा सूखा-ग्रस्त है। ऐसे में हम सभी जानते हैं कि वहां रहने वाले लोगों को पानी की कितनी किल्लत झेलनी पड़ती है।
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पानी के लिए यहां मां भी बन जाती हैं पत्नी, कहलाती हैं 'जल-पत्नी'
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मीलों तक तेज धूप में महिलाओं और बच्चों का चलकर एक ऐसी जगह पहुंचना जहां पीने का पानी उपलब्ध हो और उसे घड़े में भरकर वापस मीलों चलकर घर तक आना, इन किस्सों के बारे में आपने पहले भी सुना होगा।
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लेकिन तस्वीरों में देखकर आपको हम बताना चाहते हैं मुंबई से 85 मील की दूरी पर स्थित एक गांव डेंगामल की। ये एक सूखा-ग्रस्त गांव हैं जहां तेज गर्मी और पानी का आस-पास कोई साधन ना होने से रहने वाले लोगों को खासी दिक्कत होती है।
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ये किल्लत इतनी ज्यादा है कि वहां सखाराम भगत नाम के एक इंसान ने तीन शादियां करलीं। अब आप सोच रहे होंगे कि पानी ना होने और शादी कर लेने का क्या रिश्ता है?
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पर, हैरत होती है जानकर कि सखाराम ने एक नहीं बल्कि तीन शादियां इसलिए की हैं ताकि उसकी सभी पत्नियां रोज मीलों चलकर एक पहाड़ी के पास बने दो कुओं तक जा सके और पानी ढोकर ला सकें।
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ऐसा इसलिए ताकि घर में कभी पीने के पानी कि किल्लत ना हो। सखाराम की तीनों पत्नियां जिनका नाम साखरी, टुकी और भागी है, अपनी कमर और सिर पर दो पानी के घड़े को मीलों दूर से रोज घर तक लेकर आती हैं।
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ऐसा करने की वजह से इन्हें 'जल-पत्नी' कहा जाता है। सोचिए ये चीज अपनेआप में कितना दंग करने वाली है कि कोई इसलिए भी शादी करता है ताकि उसके घर में पानी की उपलब्धता कभी खत्म ना हो।
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और आपको बताएं कि सखाराम अकेले एक ऐसे आदमी नहीं हैं जो ऐसी शादी रचाए हैं। आपको अचंभा होगा जानकर कि जल-पत्नियों की परंपरा सी बन चुकी ये जगह ऐसी है जहां कई आदमी ऐसी ही शादी करते हैं।
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सूखे-ग्रस्त इलाके में खाना बनाने से लेकर पानी पीने तक हर चीज के लिए पत्नियों पर निर्भर रहते हैं मर्द।
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ये भी एक दिक्कत है कि दूर उस कुंए पर हर वक्त भीड़ रहती है। एक पत्नी ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकती क्योंकि घर लौटकर भी उसे अन्य काम होते हैं।
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ऐसे में घर में पानी कि किल्लत बनी रहती थी। तो यहां कई पत्नियों की परंपरा शुरू की गई।
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खुद सुखाराम कहते हैं कि उनकी दूसरी पत्नी बच्चों को संभालने में बिजी रहती थी। वो पानी नहीं लेकर आ सकती थी। तो उन्हें घर में पानी लेकर लाने वाले किसी व्यक्ति की जरूरत थी।
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वो मानते हैं कि उन्होंने तीसरी शादी सिर्फ इसलिए की क्योंकि उन्हें पानी भरकर लाने वाली कोई महिला चाहिए थी। उनकी तीसरी पत्नी सिर्फ खाना बनाती हैं और पानी भरकर लाती हैं। रूढ़िवादी समाज में सम्मान पाने के लिए विधवा या अकेली मां भी जल पत्नी बनने के लिए राजी हो जाती हैं।
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सरकार के आंकड़ों को देखा जाए तो देश में लगभग 19 हजार गांव ऐसे हैं जहां पानी की लोगों को कोई उपलब्धता नहीं है।
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इस साल ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत के बड़े हिस्से में सूखा पड़ सकता है क्योंकि बारिश के काफी कम होने के आसार है।
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बहु-पत्नी रखने की परंपरा हमारे देश में गैर-कानूनी है। फिर भी डेंगामल में आम है।
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ये अजीब है पर सूखा-ग्रस्त और गरीबी की मार झेल रहे देश के कई इलाकों में पानी के लिए तरकीबें लगानी होती है।
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इन लोगों के लिए ऐसा करने के अलावा कोई चारा भी नहीं है।