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पहली मारुति 800 कार के बारे में कुछ रोचक बातें

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मारुति मतलब कार, लाखों भारतीयों के लिए मारुति का मतलब यही था। मारुति की सबसे लोकप्रिय कार मारुति 800 आज एक बार फिर सोशल साइट्स पर याद की जा रही है। पहली मारुति 800 के मालिक हरपाल सिंह और उनकी पत्नी गुलशनबीर कौर की मृत्यु के बाद इस कार की देख रेख करने वाला कोई नहीं है। यह खबर जानकर सोशल साइट्स पर कई लोगों ने इस कार को खरीदने की इच्छा जाहिर की है।

फोटो साभार हिंदुस्तान टाइम्स
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पहली मारुति 800 कार के बारे में कुछ रोचक बातें

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14 दिसंबर 1983 को इंदिरा गांधी ने पहली कार की चाभी सौंपी-दिल्ली के हरपाल सिंह को। तब इसकी कीमत लगभग 50,000 रुपए थी। देखते-ही-देखते 1984 तक मारुति की पहली 20,000 कारें भारत की सड़कों पर दौड़ती नजर आने लगीं।
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पहली मारुति 800 कार के बारे में कुछ रोचक बातें

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मार्च 1994 तक मारुति ने दस लाख से भी ज्यादा कारें तैयार कर लीं जो भारत में किसी भी कार कंपनी के लिए एक कीर्तिमान है। अप्रैल 2003 तक मारुति जापान और कोरिया के बाहर कार बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन गई। कंपनी इस समय तक चालीस लाख कार बना चुकी है।

पहली मारुति 800 कार के बारे में कुछ रोचक बातें

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मारुति 800 देश में पहली बार कई नए फीचर लेकर आई। जैसे-एयरकंडिशनर, छोटा आकार। अपने अंतिम दौर तक मारुति 800 ने आधुनिक कारों से डटकर मुकाबला किया। 2013 में जहां 20754 मारुति-800 की ब्रिकी हुई वहीं टाटा की 18,447 लखटकिया कारें ही बिक पाईं।
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पहली मारुति 800 कार के बारे में कुछ रोचक बातें

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ऑटोकार इंडिया के संपादक हॉर्मजद सोराबजी ने भी इस कार को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। उनका कहना है कि मैं चाहता हूं‌ कि कार की भव्यता बरकरार रहे। चाहे वह मैं, उसके मालिक या मारुति कोई भी रखे। वह बताते हैं कि इसी पर उनके परिवार के अधिकतर लोगों ने ड्राइविंग सीखी है। सोराबजी ने हाल ही में एक मारुति 800 खरीदी है जो इसके सबसे पहले लॉट में से एक है।
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पहली मारुति 800 कार के बारे में कुछ रोचक बातें

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पिछली साल 18 जनवरी से मारुति 800 का उत्पादन पूरी तरह से बंद कर दिया गया, हालांकि अगले 8-10 वर्षों तक इसके पुर्जे उपभोक्ताओं के लिए बाजार में उपलब्ध रहेंगे। 18 जनवरी को असेंबल होने के लिए गुड़गांव प्लांट में आई। इसके साथ ही कार का 31 सालों का सफर थम गया।
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