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'यहां करोड़ों की कार हजारों में बिक रही है'

Mon, 15 Feb 2016 06:32 PM IST
सौतिक बिस्वास / बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
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इस्तेमाल की गई कारों से भरे विशाल मैदान में जंबू कुमार तेजी से अपनी नजरें इधर उधर दौड़ा रहे हैं। उन्हें मर्सिडीज बेंज सीडान की तलाश है। 29 साल के जंबू कुमार के घर में छह साल पहले तक कोई कार नहीं थी। ऑटोमोबाइल के स्पेयर पार्ट्स का छोटा सा कारोबार करने वाले जंबू कुमार ने 2009 में स्कोडा कार खरीदी थी। वे परिवार के पहले शख्स थे, जिसने कार खरीदी। जब उन्हें अपने दोस्तों से मालूम हुआ कि चेन्नई में बीते साल आई बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुई कारों की बिक्री हो रही है, वे खुद को वहां तक पहुंचने से नहीं रोक पाए। 
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कारों में जंबू की खूब दिलचस्पी है और उनका सपना मर्सिडीज बेंज खरीदने का रहा है, लेकिन उनके पास कभी उतने पैसे नहीं रहे। लेकिन बाढ़ में क्षतिग्रस्त, इस्तेमाल हुई कारों की नीलामी के चलते उनका सपना पूरा होने वाला है। वे दस लाख रुपये की बजट के साथ नीलामी में आए हैं। जंबू कुमार कहते हैं, “मेरी पत्नी ने मुझसे कहा है कि मर्सिडीज लेकर ही लौटना। इसलिए मैं यहां मर्सिडीज तलाश रहा हूँ। अगर मेरे पिता जीवित होते तो मुझ पर काफी गर्व करते।” जबूं कुमार के अलावा यहां दूसरे लोग भी पहुंचे हैं, जिनमें पुरानी कारों की ख़रीद बिक्री करने वाले डीलर, कार को किराए पर देने वाले ऑपरेटर शामिल हैं। इनके सामने नीलामी के लिए सैकड़ों कार मौजूद हैं। इनमें हैचबैक, सीडान कारों के अलावा जगुआर, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी लग्जरी कारें भी शामिल हैं।
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इनमें से कई गाड़ियां अभी भी कीचड़ में सनी हैं। कई गाड़ियों की इंटीरियर अस्त व्यस्त है। करीब दो महीने पहले चेन्नई में आई इस सदी के सबसे भयावह बाढ़ में हजारों कारें बर्बाद हो गईं।अब ये कारें ही कई लोगों के सपने को परवान दे रही हैं। चेन्नई से करीब एक हजार किलोमीटर दूर स्थित पुणे में एक ऑटोमोबाइल रिपेयर वर्कशाप चलाते हैं ज्योतिराम चौगले। चौगले के ग्राहकों ने जब इस नीलामी के बारे में सुना तो उन्होंने चौगले को चेन्नई के विमान पर चढ़ा दिया। उन तीनों ने अख़बारों में कहीं पढ़ा था कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त 2012 मॉडल की पोर्श केयने की नीलामी महज पांच लाख रुपए में हुई थी।

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चौगले ने बताया, “मैं अपने ग्राहकों के लिए लग्जरी कार की तलाश में आया हूँ- जगुआर, रेंज रोवर, पोर्शे और दूसरी कारें।” लेकिन जिस दिन चौगले नीलामी में शामिल होने आए हैं, उस दिन कोई पोर्शे मौजूद नहीं थी। उन्होंने जगुआर और ऑडी जैसी कारों की तस्वीर अपने ग्राहकों को व्हाट्सऐप के जरिए भेजीं।चौगले बताते हैं, “मैं काफी उधेड़बुन में हूँ। मैंने कभी इस शहर को नहीं देखा। मैं किसी नीलामी में भी नहीं गया। लेकिन मैं यहां अपने ग्राहकों के लिए कार लेने आया हुआ हूँ।” एक अनुमान के मुताबिक, इस बाढ़ में करीब 40 हजार गाड़ियां बर्बाद हुई हैं।
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ऑटोमोबाइल पोर्टल 'कारदेखो' के अभिषेक गौतम के मुताबिक, कार बीमा करने वाली कंपनियों का मानना है कि इनमें 40 फीसदी कारें पूरी तरह से नुकसान देने वाली साबित हुई हैं। इसका मतलब यह है कि इन कारों को कंपनी के वर्कशॉप में रिपेयर कराना काफी महंगा साबित होगा। कार बीमा करने वाली कंपनियों ने क्षतिग्रस्त कारों की नीलामी की योजना बनाई है।मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि कार का बीमा करने वाली कंपनियों के पास करीब 50 हजार दावे पहुंचे हैं जो करीब 74 करोड़ डॉलर से ज्यादा के हैं। गौतम ने बताया कि उनकी कंपनी को 18 बीमा कंपनियों की ओर से कार मिली हैं और 'कारदेखो' पोर्टल करीब 1,500 क्षतिग्रस्त कारें बेचने की उम्मीद कर रहा है।
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बीते 40 दिनों के दौरान उन्होंने 700 कारों की नीलामी की है। यह नीलामी किराए पर लिए गए तीन मैदानों में हुई है। इस नीलामी में हिस्सा लेने के लिए देश भर से 700 से ज़्यादा डीलरों ने दिलचस्पी दिखाई। 'कारदेखो' पोर्टल की ओर से होने वाली नीलामी में 2014 की मर्सिडीज बेंज एस क्लास की नीलामी 44 लाख रुपए में हुई, जो उसकी बाज़ार कीमत की आधी से भी कम है। एक हैचबैक कार की नीलामी 20 हजार रुपए में हुई। गौतम ने कहा, “यह चाहत से जुड़ी बात है। कुछ खरीददारों के लिए तो यह काफी फायदे का सौदा
साबित हुआ।”
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उन्होंने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के मैनेजर के बारे में बताया जो एक सुबह अपने पायजामे में ही नीलामी वाली जगह आया और एक तिहाई क़ीमत पर ऑडी खरीद कर ले गया। नीलामी करने वालों के मुताबिक, पानी से कार की इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ही क्षतिग्रस्त होते हैं और ज्यादातर गाड़ियों की बॉडी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इन लोगों के मुताबिक, 70 हजार रुपए से लेकर दो लाख रुपए के बीच कार की इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल सर्किट बदली जा सकती है। यानी जो कारें अभी इस्तेमाल लायक नहीं हैं, उन्हें भारतीय ऑटोमोबाइल वर्कशाप काम के लायक बना सकते हैं। लेकिन ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट हॉर्माजड सोराबजी इन दावों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं।

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'ऑटो कार इंडिया' पत्रिका के संपादक सोराबजी ने कहा, “पानी कारों का सबसे ख़तरनाक दुश्मन होता है। आपको काफी चीजें बदलनी होती हैं। केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को बदलना काफी नहीं हैं।” सोराबजी ने कहा, “पानी से कार के मैकनिकल पार्ट्स की उम्र कम हो जाती है, जिसमें ड्राइव शाफ्ट, बेयरिंग और सस्पेंसन कंपोनेंट्स शामिल हैं, इसके इलावा इलेक्ट्रिकल सिस्टम तो खराब होता ही है।”सोराबजी ने यह भी बताया, “बाढ़ में क्षतिग्रस्त कारों को खरीदना खतरा उठाने जैसा है।”
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इस नीलामी में शामिल होने के लिए स्टॉक मार्केट में निवेश करने वाले अरुण भी मौजूद हैं। अरुण ने बताया, “शेयर बाजार इन दिनों मंदा है। उन्हें स्थानीय वर्कशाप में रिपेयर कराऊंगा और फिर उसे बेच दूंगा। कुछ पैसे बन जाएंगे। मैं अपनी  किस्मत आजमाने आया हूँ।” अरुण 2011 की फॉक्सवैगन मॉडल की कार 2,35,000 रुपये में खरीद चुके हैं जो बाजार मूल्य के आधे से भी कम है। जाहिर है, क्षतिग्रस्त कारों की इस नीलामी सपनों को नई उड़ान मिल रही है।
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