वास्तु एक प्राचीन वैज्ञानिक पद्घिति है जिसे आज के समय में भी नकारा नहीं जा सकता। कारण यह है कि संसार में सभी कुछ उर्जा द्वारा नियंत्रित है। उर्जा दो तरह की होती है नकारात्मक और सकारात्मक। जहां वास्तु अनुकूल होता है वहां सकारात्मक उर्जा का संचार होता और जहां वास्तु में किसी प्रकार का दोष आता है तो नकारात्मक उर्जा का संचार होने लगता है जो स्वास्थ्य की हानि से लेकर आर्थिक परेशानी का कारण बनकर तकलीफ देता है।
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इन पांच कारणों से अक्सर आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है
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गणेश जी शुभ लाभ के दाता हैं। इसलिए घर में इनकी मूर्ति या तस्वीर सभी लोग रखते हैं। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि गणेश जी घर के बाहर की ओर देखेंगे तो धन और शुभ लाभ का घर में आगमन होगा। जबकि वास्तु का सिद्घांत इससे बिल्कुल अलग है। गणेश जी का मुख हमेशा घर के अंदर की ओर होना चाहिए और पीठ बाहर की ओर। गणेश जी बाहर की ओर देखेगे तो लाभ बढ़ने की बजाय कम हो सकता है।
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इन पांच कारणों से अक्सर आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है
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वास्तु विज्ञान के अनुसार उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है जो धन वृद्घि कारक है। इस दिशा में जल स्रोत यानी नल, पानी का मटका, वॉटर फिल्टर होने से धन की वृद्घि है। लेकिन कई लोग अनजाने में दक्षिण या पश्चिम दिशा में मटका, नल या दूसरे जल स्रोत रखना शुरु कर देते हैं। इससे धन आगमन में बाधा आती है और खर्च भी बढ़ने लगता है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जल स्रोतों से जल का रिसाव नहीं हो। पानी का टपकते रहना आर्थिक नुकसान का कारण होता है।
इन पांच कारणों से अक्सर आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है
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कई लोग घर के कबाड़ को छत पर ले जाकर रख देते हैं। जबकि छत हमेशा साफ होना चाहिए। वास्तु विज्ञान के अनुसार छत के ऊपर कभी भी मटका और बर्तन उलटा करके नहीं रखना चाहिए। इससे आकस्मिक हानि होती है। घर का स्वामी तनाव और आर्थिक परेशानियों में रहता है।
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इन पांच कारणों से अक्सर आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है
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वास्तु विज्ञान में धन वृद्घि की इच्छा है तो जिस अलमारी या तिजोरी में धन
रखते हैं उसे पश्चिम की दीवार से लगकर रखें। इससे तिजोरी और अलमारी का मुंह
पूर्व दिशा की ओर खुलेगा और देवराज की कृपा दृष्टि आप पर बनी रहेगी। उत्तर
की दिशा से अलमारी या तिजोरी लगाकर रखने से उसका मुंह दक्षिण दिशा में
खुलता है जो नुकसानदेय होता है।