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कौन है मौलाना मसूद अजहर, वो कितना खूंखार, कैसे काम करता है जैश-ए-मोहम्मद

Sun, 03 Mar 2019 06:01 PM IST
संदीप भट्ट अमर उजाला, ब्यूरो
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Masood Azhar - फोटो : PTI
मौलाना मसूद अजहर आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है। इसी जैश-ए-मोहम्मद संगठन ने भारत के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें हमारे चालीस से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे। बाद में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप को नष्ट करने का दावा किया था। मसूद अजहर पर ही पठानकोट में आतंकी हमले कराने का आरोप लगा था।

मीडिया सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अस्पताल में पहले से भर्ती मसूद अजहर ने दम तोड़ दिया है, हालांकि इसकी पुष्टि न तो पाकिस्तानी अधिकारियों ने की है और न ही भारतीय।

ये वही मौलाना मसूद अजहर है जिसे 17 साल पहले 1999 में कंधार विमान अपहरण मामले में भारत ने रिहा किया था। 

मालूम हो कि 24 दिसंबर 1999 को 5 हथियारबंद आतंकवादियों ने 178 यात्रियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के हवाई जहाज आईसी-814 का अपहरण कर लिया था। हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के आतंकियों ने भारत सरकार के सामने 178 यात्रियों की जान के बदले में अपने तीन आतंकियों की रिहाई का सौदा किया था। उन तीन आतंकवादियों में से एक मसूद अजहर भी था। 

1999 में वाजपेयी सरकार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया था। उस वक्त मौलाना मसूद अजहर आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य था। 

रिहाई के बाद पाकिस्तान के कराची में 31 जनवरी 2000 को मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन की शुरुआत के साथ जेहाद की दुनिया में फिर कदम रखा।
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masood azhar
मौलाना मसूद अजहर पर एक नजर

जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का मुखिया मौलाना मसूद हरकत-उल-अंसार का महासचिव भी रह चुका है। आतंकी अजहर का जन्म पाकिस्तान के बाहावलपुर में 1968 को हुआ था। ग्यारह भाई-बहनों में अजहर 10वें नंबर के थे। अजहर के पिता सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे। उसका परिवार डेयरी का करोबार भी करता था। 

मौलाना मसूद अजहर की शिक्षा करांची में जामिया उलूम अल इस्लामिया में हुई। बाद में अजहर हरकत-उल अंसार संगठन से जुड़ गया। पहली बार अजहर को 1994 में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में श्रीनगर में गिरफ्तार किया गया।

दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद अजहर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था लेकिन लाहौर हाईकोर्ट के आदेश पर 2002 में उसे रिहा कर दिया गया।

2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या और उसके अपहरण के बाद अमेरिका ने अजहर मसूद को सौंपने की मांग की थी। मसूद के सहयोगी शेख अहमद सईद उमर ने पर्ल की हत्या कर दी थी।2003 में परवेज मुशर्रफ  पर हुए आत्मघाती हमले के मामले में भी उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

दिसंबर 2008 में भारत और अमेरिका के दबाव के कारण पाक सरकार ने मसूद को उसके आवास पर नजरबंद कर दिया था। इससे पहले भी दो बार अजहर को हिरासत में लिया गया था हालांकि हर बार वह बचने में कामयाब रहा। 
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आतंकवादी मसूद अजहर
क्या है आतंकी मसूद का आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद

जैश-ए-मोहम्मद एक पाकिस्तानी जिहादी संगठन है जिसके आतंकी जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई राज्यों में हुए आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं। 

मार्च इसकी स्थापना साल 2000 में  मसूद अजहर ने की थी। जनवरी 2002 में जब इसे पाकिस्तान की सरकार ने बैन कर दिया तब जैश ए मोहम्मद ने अपना नाम बदलकर खुद्दाम उल इस्लाम कर लिया था।

इन देशों में प्रतिबंधित है मसूद का संगठन
मसूद अजहर के आतंकी संगठन पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत समेत कई देशों में प्रतिबंधित है। फिर भी मसूद अजहर पाकिस्तान में खुलेआम रैलियों में भारत के खिलाफ जहर उगलता है। मसूद अजहर को भारतीय विमान के अपहरण करने के लिए कभी कोई सजा नहीं मिली।

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मसूद अजहर
ऐसे काम करता है जैश-ए-मोहम्मद

जैश-ए-मोहम्मद (आतंकी संगठन) की स्थापना फरवरी 2000 में पाक के कराची में संगठन के मुखिया मौलाना मसूद अजहर ने की। इस आतंक संगठन का मुख्य उद्देश्य कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी करना व भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देना है।

संगठन का मुख्य तरीका आत्मघाती हमला करना है। जैश-ए-मोहम्मद कट्टरपंथी विचारों वाले ऑडियो कैसेट कश्मीर भेज कर युवाओं को गुमराह करता है।इस संगठन में हरकत-उल-मुजाहिद्दीन और हरकत-उल-अंसार के कई चरमपंथी शामिल हैं।

अमेरिका की ब्लैक लिस्ट में जैश-ए-मोहम्मद
अमेरिका द्वारा तैयार की गई विदेशी आतंकी गुटों की सूची में पाक स्थित जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा को रखा गया था। इस सूची में 44 आतंकी संगठन शामिल हैं। लश्कर और जैश दोनों ही लंबे समय भारत में आतंकी गतिविधियां चला रहे हैं।
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बड़ी आतंकी वारदातें : संसद भवन पर हमला (दिसंबर, 2001), जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला (अक्टूबर 2001), इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण (दिसंबर 1999), अयोध्या और वाराणसी धमाके।

नवंबर, 2007 में उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ द्वारा लखनऊ में गिरफ्तार किए गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह राहुल गांधी के अपहरण के लिए देश में आए थे।

2015 में जैश से संबंधित घटनाएं
* 15 जनवरी - दक्षिणी कश्मीर के केलर इलाके के गाडरू जंगल क्षेत्र में पांच जैश के आतंकियों को सेना द्वारा एक मुठभेड़ में ढेर किया गया। मारे गए आतंकियों में से एक जैश कमांडर मोहम्मद तोइब था जो पाकिस्तान मुल्तान का रहने वाला था जबकि बाकी के चार स्थानीय आतंकी थे।

* 20 मार्च - जम्मू संभाग के कठुआ जिले के राजबाग पुलिस थाने पर सेना की वर्दी में फिदायीन हमला हुआ, जिसमें तीन जवान शहीद हुए। इसके अलावा एक स्थानीय नागरिक की भी इसमें मौत हुई। जवाबी कार्रवाई में दो आतंकियों को भी ढेर किया गया, जबकि 10 लोग इस हमले में घायल हुए थे।

* 21 मार्च - दो आतंकियों ने जम्मू संभाग के सांबा जिले में सेना के एक कैंप पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने दोनों को ढेर कर दिया।

* 27 जुलाई - दस लोगों सहित एक एसपी उस समय शहीद हो गए जब हथियारों से लैस तीन आतंकियों ने गुरदासपुर के दीना नगर थाने पर धावा बोला। मरने वालों में तीन आतंकी, तीन स्थानीय नागरिक और चार पुलिस कर्मी थे।

* 04 अक्टूबर - दक्षिणी कश्मीर के हारी परिगाम ट्त्राल में जैश के दो विदेशी आतंकियों को सेना ने मुठभेड़ के दौरान ढेर किया। इनकी पहचान आदिल पठान और बर्मी के तौर पर हुई थी।

* 25, नवंबर - उत्तरी कश्मीर के टंगधार में सेना के कैंप पर हुए आत्मघाती हमले में एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई, जबकि तीन आतंकियों को सेना द्वारा ढेर किया गया।
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जैश-ए-मोहम्मद को खड़ा करने में क्या है आईएसआई की साजिश
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपना वजूद खो चुके आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को पंजाब में कारगर हमले कर अपना मूल्य साबित करने का मौका दिया है। यही वजह है कि जैश ताजा तैयारियों के साथ पंजाब को आतंक का नया स्टेज बनाने के लिए प्रयोग कर रहा है। 

खुफिया सूत्रों के मुताबिक इसके लिए जैश बब्बर खालसा जैसे पंजाब आतंकवाद के बचे हुए गुटों से भी मदद ले रहा है। साथ ही जैश गुरदासपुर-पाठनकोट-जम्मू सेक्टर के 553 किलोमीटर की फेंसिंग के कमजोर इलाकों को भी अपने सामरिक बढ़त के तौर पर देख रहा है।

इस हमले की शुरुआती समीक्षा कर रहे सुरक्षा एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि पाक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोयबा पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते आईएसआई जैश को नए हथियार के रुप में फिर से खड़ा कर रहा है। खुफिया जानकारी के मुताबिक इस हमले में जैश का हाथ होने के पक्के सुराग मिले हैं। 

भारत के संसद पर हमले के बाद अपनी खूंखार छवि बनाने वाले जैश के आईएसआई ने करीब दस साल पहले पर कतर दिए थे। क्योंकि इसके प्रमुख मौलाना मसूद अजहर ने पाक सेना को ही चुनौती देनी शुरु कर दी थी। गौरतलब है कि कांधार हाईजैंकिंग के सौदे में भारत के जेलों में बंद जिन तीन आतंकियों को छोड़ा गया था वह सभी जैश के थे। 

जैश प्रमुख मसूद अजहर उन्हीं छोड़े गए आतंकियों में एक था। सूत्रों ने बताया कि जैश ए मोहम्मद लश्कर ए तोयबा से ज्यादा खतरनाक और जिद्दी संगठन है। आईएसआई की ओर से जैस में नयी जान फूंकना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए नयी चुनौती खड़ी कर सकता है।
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