उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 से पहले समाजवादी पार्टी में घमासान मचा हुआ है। एक तरफ अखिलेश यादव है तो दूसरी तरफ उनके चाचा शिवपाल यादव। इस बीच अखिलेश ने शिवपाल के अलावा जिन नेताओं का विरोध किया था उनमें एक नाम विधायक मुख्तार अंसारी का भी है। ये उन चार नेताओं में से हैं जिन्हें सीएम अखिलेश बिलकुल पसंद नहीं करते। बताते चलें कि हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अंसारी की तारीफ में चार चांद लगाते हुए उसे एक इज्जतदार शख्स बता डाला।
आइए हम आपकों बताते हैं मुलायम सिह के इज्जतदार अंसारी का अपराध की दुनिया में कैसा रहा है इतिहास।
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मुलायम के 'इज्जतदार' मुख्तार अंसारी पर दर्ज हो चुके हैं मर्डर-किडनैपिंग के कई मामले
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मऊ से विधायक रहे अंसारी का नाम 1988 में एक मर्डर केस में आया था, लेकिन पुख्ता सबूत न होने की वजह से उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा नहीं कसा जा सका। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2007 में मुख्तार अंसारी ने मऊ से चुनाव लड़ा था, उस वक्त उनके खिलाफ 13 आपराधिक मुकदमे लंबित थे, जिसमें हत्या, हत्या की कोशिश, जैसे कई संगीन अपराध में वह नामजद थे।
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मुलायम के 'इज्जतदार' मुख्तार अंसारी पर दर्ज हो चुके हैं मर्डर-किडनैपिंग के कई मामले
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एक आंकड़े के मुताबिक मुख्तार अंसारी खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और अपहरण जैसे अपराधों में लिप्त रहे हैं। 1988 से लेकर 2005 तक अंसारी के खिलाफ 31 मामले दर्ज किए गए थे। जिसमें से कई मामलों में उन्हें दोषी पाया गया, कुछ मामलों में सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया था।
मुलायम के 'इज्जतदार' मुख्तार अंसारी पर दर्ज हो चुके हैं मर्डर-किडनैपिंग के कई मामले
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इस बीच साल 2005 में बीजेपी नेता की हत्या के आरोप में अंसारी को गिरफ्तार किया गया था। बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में भी सबूतों के अभाव में कोर्ट ने अंसारी को बरी कर दिया था। ये मामले राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, वाराणसी, मऊ, लखनऊ सहित तकरीबन 8 शहरों से जुड़े हुए थे।
मुलायम के 'इज्जतदार' मुख्तार अंसारी पर दर्ज हो चुके हैं मर्डर-किडनैपिंग के कई मामले
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राजनीतिक उथल-पुथल और मऊ में हिंसा के बाद अंसारी का विरोध किया जाने लगा और उनके ऊपर कई आरोप भी लगाए गए। विरोध के बीच 2005 में अंसारी ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद पहले उन्हें गाजीपुर से मथुरा जेल भेजा गया था लेकिन, बाद में उन्हें आगरा जेल में भेज दिया गया था। वे तब वह आगरा जेल में ही बंद हैं।