बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ‘मैडम’ राज चल रहा था। ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत मामले की जांच करने के लिए पहुंची तीन सदस्यीय टीम की प्रारंभिक जांच में इसका खुलासा हुआ है।
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बीआरडी अस्पताल, गोरखपुर
पता चला है कि पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की कुर्सी पर पत्नी डॉ. पूर्णिमा मिश्र काबिज रहती थीं। हर फाइल पर कमीशन का खेल चलता था। इसकी सीधी डीलिंग ‘मैडम’ यानी पूर्व प्राचार्य की पत्नी डॉ. पूर्णिमा ही करती थीं। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के 10 कर्मचारी और डॉक्टरों ने शपथ पत्र देकर डॉ. पूर्णिमा की शिकायत की है। ऑक्सीजन सप्लाई की फाइल भी उन्होंने ही रोकी थी। इसके पीछे भी कमीशन का खेल था। जांच टीम को 20 अगस्त तक रिपोर्ट देनी है।
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बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज
- फोटो : ANI
शासन के निर्देश पर विशेष सचिव आयुष यतींद्र मोहन, ऋषिकेश दूबे, होम्योपैथ निदेशक विनोद कुमार विमल बृहस्पतिवार को सर्किट हाउस पहुंचे। सर्किट हाउस में ही डॉ. पूर्णिमा की शिकायत करने वाले राजन यादव, सिंगेश देवी और राहुल श्रीवास्तव को बुलाकर पूछताछ की। इन सबने कमीशन के खेल का खुलासा किया। सूत्रों ने बताया कि शासन की टीम ने मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टर, कर्मचारियों से भी पूछताछ की है।
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गोरखपुर
- फोटो : SELF
ज्यादातर ने बताया है कि कमीशन से लेकर कर्मचारियों की नियुक्ति आदि मामलों का फैसला मैडम ही करती थीं। फिर पूर्व प्राचार्य के उसपर हस्ताक्षर होते थे। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स से मैडम की ट्यूनिंग ठीक नहीं थी। इसी का नतीजा रहा कि बजट होते हुए भी ऑक्सीजन आपूर्ति का बकाया पैसा नहीं दिया गया। स्टाफ की नियुक्ति, पदोन्नति में नियमों की अनदेखी की बात भी कही गई है।
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बाबुओं से सीधे करती थीं डीलिंग
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gorakhpur
जांच टीम को शिकायत मिली कि मैडम विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति और तैनाती में रकम उगाही करती थीं। ट्रांसफर, पोस्टिंग में में भी दखल चलता था। ऑक्सीजन खरीदने के मामले में 10 से 12 फीसदी कमीशन लिया जाता था।
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संबद्धता में नियम, मानक दरकिनार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट, योगी आदित्यनाथ
भूमिका की जांच करने पहुंची टीम ने एक अन्य मामले की तफ्तीश भी की। डॉ. पूर्णिमा होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के तौर पर गोला जनपद में तैनात थीं, जिसके बाद उन्हें केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद द्वारा स्थापित क्लीनिकल ट्रायल यूनिट में संबद्ध किया गया। इसमें नियम, मानक दरकिनार कर दिए गए।
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सरकार को मुख्य सचिव की रिपोर्ट का इंतजार
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फाइल
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत मामले में सरकार को मुख्य सचिव की रिपोर्ट का इंतजार है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित क मेटी डीएम की रिपोर्ट में सामने आए बिंदुओं का भी परीक्षण कर रही है। 20 अगस्त तक जांच पूरी होने की संभावना है। इसके बाद ही मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. अनिता भटनागर जैन ने बताया कि अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। इस रिपोर्ट के अनुसार ही विभाग कार्रवाई करेगा। जांच समिति 20 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
जांच समिति ने मेडिकल कॉलेज के भी रिकॉर्ड मंगाए
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मुख्य सचिव
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी जांच समिति ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में ले लिए हैं। साथ ही महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा से भी फाइलें मंगाई हैं। जांच समिति न सिर्फ घटना की पृष्ठभूमि में जाएगी बल्कि इस घटना के दोषियों का भी पता लगाएगी। दोषियों पर क्या कार्रवाई की जानी है इसका प्रस्ताव भी यह समिति करेगी। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए भी समिति सुझाव देगी।
गोरखपुर हादसे की सीबीआई जांच हो: अखिलेश
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योगी सरकार, सीएम अखिलेश
- फोटो : SELF
उन्नाव के कृषि अनुसंधान केंद्र में पत्रकारों से मुखातिब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक साथ कई मुद्दों पर केंद्र व प्रदेश सरकार को घेरा। कहा कि गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की जान चली गई, वहां के डीएम ने अपनी रिपोर्ट में भी ऑक्सीजन की वजह से मौत होने की बात कही है, लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है। उन्होंने गोरखपुर मामले की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के जज से कराने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री ने इसके अलावा किसानों की कर्ज माफी, औरैया प्रकरण, शिक्षामित्रों के परिजनों को मुआवजा, एंटी भूमाफिया कानून व सूबे की कानून-व्यवस्था पर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
मेडिकल कॉलेज के मौतों की हो न्यायिक जांच : सुभाषिनी
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फाइल
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ‘मार्क्सवादी ’ की पोलित ब्यूरो की सदस्य और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल ने गुरुवार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। साथ ही पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की। सुभाषिनी ने कहा कि मौत के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की।
पूर्व सांसद ने सहयोगी मधु गर्ग के साथ बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण किया। वार्ड में जाकर बीमार बच्चों के तीमारदारों से बात की। इससे पहले वह बिछिया गांव गईं। वहां जाहिद और उनकी पत्नी से मुलाकात की। जाहिद के पांच साल की बच्ची की मौत भी मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके बाद पूर्व सांसद ने जंघा घुड़मरवा टोला जाकर गुप्ता परिवार से मुलाकात की। सुभाषिनी ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो इस तरह की घटनाएं दोबारा होंगी।