त्विषा शर्मा केस का री क्रिएशन के दौरान गिरिबाला सिंह के घर बाहर तैनात पुलिसकर्मी
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चोट को लेकर अभी भी असमंजस
समर्थ सिंह ने भोपाल पुलिस और सीबीआई की रिमांड के दौरान अपने बयान में कहा है कि उसने त्विषा से कोई मारपीट नहीं की थी। त्विषा के शरीर पर जो भी चोटें लगी हैं या मेडिकल रिपोर्ट में आई हैं, वह त्विषा को फंदे से उतारने के दौरान लगी होंगी। क्योंकि उस समय 80 किलो वजनी अचेत लड़की को संभालना मुश्किल हो रहा था। जल्दी भी थी कि अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि उसकी जान संभव हो तो बचाया जा सके। सीबीआई के अधिकारी फंदे के करीब 40 मिनट के री-क्रिएशन के दौरान चोट वाले प्वाइंट पर अधिक फोकस किए रहे। क्योंकि घटना का सामान्य रीक्रिएशन एक बार भोपाल पुलिस और एक बार रिमांड के दौरान सीबीआई समर्थ सिंह को लेकर करा चुकी है। सोमवार को किया गया रीक्रिएशन गिरिबाला सिंह के साथ फाइनल रीक्रिएशन था। सीबीआई के अधिकारी इस रीक्रिएशन के बाद भी नहीं समझ पा रहे हैं कि वहां ऐसी कोई वस्तु नहीं थे, कोई बाहरी व्यक्ति भी नहीं थे और जिस तरह से मां-बेटे और एक रिश्ततेदार युवक के साथ त्विषा को फंदे से उतारने के बाद घर के बाहर तक लाने का घटनाक्रम बताया, उस दौरान चोट कैसे लगी, शरीर में आधा दर्जन चोटें त्विषा के कब लगीं। यह सीबीआई के अधिकारी अभी भी समझ नहीं पा रहे हैं।
समर्थ के मौसेरे भाई व घरेलू नौकर भी आज रहे मौजूद
12 मई की रात सीबीआई की टीम ने त्विषा शर्मा का शव फंदे से जब नीचे उतारा था तो तीन युवक सीसीटीवी में दिख रहे थे। समर्थ सिंह के अलावा स्वराज सिंह बघेल और घरेलू नौकर को पहले ही गिरिबाला सिंह के घर बुला लिया था। दोनों ने समर्थ को त्विषा का शव फंदे से नीचे उतारने में मदद की थी। स्वराज सिंह बघेल समर्थ सिंह के मौसी के बेटे हैं और उनके पड़ोस में ही रहते हैं। स्वराज सिंह बघेल की मां डॉक्टर हैं। स्वराज सिंह और घरेलू नौकर से भोपाल पुलिस की एसआईटी के साथ सीबीआई पहले भी पूछताछ कर चुकी है।
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