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Sawan 2025: रौद्र रूप में बह रहा केदारेश्वर महादेव झरना, 289 साल पुराने मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग; तस्वीरें

Mon, 28 Jul 2025 01:14 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम

सार

Kedarneshwar Mahadev Mandir: रतलाम जिले के अडवानिया गांव में 289 साल पुराने केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना सावन में रौद्र रूप में बह रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से झरने के पास नहीं जाने की अपील है।
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केदारेश्वर महादेव झरने का तेज बहाव। - फोटो : अमर उजाला
Kedarneshwar Mahadev Mandir Story: सावन के महीने में मध्य प्रदेश के कई जिलों में झमाझम बारिश हो रही है। रतलाम में लगातार हो रही बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। शहर में कई जगहों पर जलभराव हो गया है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। 
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केदारेश्वर महादेव झरने का तेज बहाव। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, शहर से 24 किलोमीटर दूर कल्याण केदारेश्वर और शिवगढ़ मार्ग स्थित ग्राम अडवानिया केदारेश्वर में बने केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना बारिश के कारण रौद्र रूप में बह रहा है, जिससे केदारेश्वर महादेव का मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बारिश से पहाड़ी क्षेत्र में चारों ओर हरियाली की चादर छा गई है, जिसे निहारने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि, बारिश के कारण प्रशासन ने लोगों से जलप्रपात के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी है। 
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केदारेश्वर महादेव मंदिर जलमग्न।
बता दें कि केदारेश्वर महादेव मंदिर रतलाम से लगभग 25 किमी की दूर सैलाना के ग्राम अडवानिया के पास है। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से घिरी इस जगह पर आस-पास की चट्टानों से रिसता पानी इकट्ठा होता है और फिर झरने की शक्ल में मंदिर के आंगन में गिरता है। बारिश का पानी जब ऊंचाई से मंदिर के पास स्थित कुंड में गिरता है तो पानी की छोटी-छोटी सतरंगी बूंदें इंद्रधनुषी रंग बिखेरती हैं। 

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केदारेश्वर महादेव झरना। - फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 289 साल पुराना है और इसका एक अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। यहां मौजूद शिवलिंग प्राकृतिक यानी स्वयंभू है। लोग बताते हैं कि यहां पहले केवल एक शिवलिंग हुआ करता था। 1736 में सैलाना के महाराज जयसिंह ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया। बाद में यह 'केदारेश्वर महादेव मंदिर' के नाम से मशहूर हुआ। 
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बारिश से चारों ओर हरियाली। - फोटो : अमर उजाला
'केदारेश्वर महादेव मंदिर' पर हर साल महाशिवरात्रि, वैशाख पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है। सावन महीने में बड़ी संख्या में कावड़ यात्री और भगवान भोले के भक्त यहां आते हैं और जलाभिषेक करते हैं।  
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