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ओंकारेश्वर: अतिक्रमण कार्रवाई के विरोध में एकजुट हुआ नगर, लोग बोले- विकास चाहिए, शहर के लोगों का विनाश नहीं

Tue, 13 Oct 2026 09:26 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार

ओंकारेश्वर में प्रस्तावित अतिक्रमण कार्रवाई के विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों और नगरवासियों ने बैठक की। लोगों ने विकास का समर्थन करते हुए घरों और रोजगार को बचाने, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा वैकल्पिक दुकानों की व्यवस्था की मांग की। उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई से पहले संवाद और समाधान की अपील की।
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ओंकारेश्वर में हुई सर्वदलीय बैठक - फोटो : अमर उजाला

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में अतिक्रमण हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर नगर के लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। मंगलवार को ब्रह्मपुरी में नगर के नागरिकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस और भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और बड़ी संख्या में नगरवासियों ने भाग लिया। बैठक में एक स्वर में कहा गया कि ओंकारेश्वर का विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर वर्षों से बसे लोगों का रोजगार और व्यापार उजाड़ना उचित नहीं है। 



लोगों का कहना था कि तीर्थनगरी में अनेक परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनका व्यवसाय यहां आने वाले श्रद्धालुओं पर निर्भर है। कई परिवारों के पास रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेज भी हैं। ऐसे में कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास और रोजगार की स्पष्ट व्यवस्था की जानी चाहिए। बैठक में तीन बार के पूर्व कांग्रेस विधायक ठाकुर राज नारायण सिंह, खंडवा जिला ग्रामीण कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह, ओंकारेश्वर नगर भाजपा अध्यक्ष संतोष वर्मा, नगर परिषद के पार्षदों सहित वरिष्ठ समाजसेवी और बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।

ये भी पढ़ें-  ओंकारेश्वर: अतिक्रमण नोटिस पर रहवासियों में आक्रोश, सांसद-विधायक के दावों पर उठे सवाल

सीहोर में लोगों के साथ खड़े हो सकते हैं तो ओंकारेश्वर के लिए क्यों नहीं : ठाकुर राज नारायण सिंह
पूर्व विधायक ठाकुर राज नारायण सिंह ने कहा कि ओंकारेश्वर में लोग सदियों से बसे हुए हैं। यहां रहने वाले अधिकांश लोगों का व्यापार तीर्थयात्रियों पर निर्भर है। कई लोगों के पास रजिस्ट्री और पट्टे जैसे दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि यदि शासन को लगता है कि विकास कार्य के लिए कुछ स्थान आवश्यक है तो इसके लिए बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि शासन कैबिनेट स्तर की समिति बनाए, जिसमें प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक, विपक्ष के प्रतिनिधि और नगर के वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किया जाए। समिति पूरे मामले की समीक्षा कर विकास की ऐसी रूपरेखा तैयार करे, जिसमें नगरवासियों के हितों की भी रक्षा हो। ठाकुर राज नारायण सिंह ने कहा कि यदि किसी स्थान को हटाना अत्यंत आवश्यक है तो प्रभावित परिवारों का उचित व्यवस्थापन किया जाए, ताकि वे अपना व्यवसाय जारी रख सकें। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वे अपने क्षेत्र के लोगों की समस्या को लेकर उनके साथ खड़े हो सकते हैं, तो ओंकारेश्वर के जनप्रतिनिधियों को भी यहां के लोगों के बीच आकर उनकी समस्या सुननी चाहिए।

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महिलाओं की भागीदारी भी अच्छी खासी रही। - फोटो : अमर उजाला
लिखित आश्वासन के बाद फिर नोटिस क्यों?
ओंकारेश्वर नगर भाजपा अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा कि नगर के लोगों ने पूर्व में भी शासन और प्रशासन के सामने अपनी बात रखी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ममलेश्वर क्षेत्र से संबंधित प्रस्ताव को लेकर प्रशासन की ओर से पूर्व में लिखित आश्वासन दिया गया था कि वहां के लोगों को हटाने के बजाय अन्य ओंकारेश्वर नगर से हटकर अन्य स्थान पर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब उसी विषय को ममलेश्वर मंदिर विस्तार कार्यक्रम के नाम से आगे बढ़ाते हुए लोगों को दोबारा नोटिस दिए जा रहे हैं। तीन दिन का नोटिस देकर कार्रवाई की स्थिति पैदा होने से लोगों में भय है। संतोष वर्मा ने कहा कि यदि लोगों की दुकानें और रोजगार समाप्त कर दिए जाएंगे तो वे अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे। प्रशासन को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रभावित लोगों को कहां बसाया जाएगा और उनके व्यवसाय की क्या व्यवस्था होगी।

सड़क के लिए जमीन देने को तैयार, लेकिन रोजगार न छीना जाए : उत्तम पाल सिंह
खंडवा जिला ग्रामीण कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने कहा कि ओंकारेश्वर के लोग विकास के विरोधी नहीं हैं। नगर की सड़कें चौड़ी करनी हों तो लोग अपनी जमीन से कई फीट तक जगह देने के लिए तैयार हैं। जरूरत के अनुसार जितनी जमीन आवश्यक हो, उस पर भी बातचीत की जा सकती है। लेकिन उन्होंने कहा कि लोगों का व्यापार और रोजगार पूरी तरह समाप्त करके उन्हें बेदखल करना न न्यायसंगत है और न ही धार्मिक नगरी की भावना के अनुरूप। उत्तम पाल सिंह ने कहा कि प्रशासन ने यदि पूर्व में लिखित रूप से कोई आश्वासन दिया है तो उसे निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी ओंकारेश्वर में नगर बंद और आंदोलन की स्थिति बन चुकी है। उस समय जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद लोगों ने आंदोलन समाप्त किया था। उन्होंने कहा कि आज की बैठक किसी राजनीतिक दल की बैठक नहीं थी। इसमें भाजपा, कांग्रेस और अन्य विचारधाराओं से जुड़े लोग एक साथ नगर की समस्या को लेकर आए हैं। मुद्दा राजनीति नहीं बल्कि ओंकारेश्वर के लोगों के भविष्य का है।

 
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ओंकारेश्वर में मंगलवार को बड़ी बैठक हुई। - फोटो : अमर उजाला
जरूरत जितनी हो उतनी जमीन लें, लेकिन लोगों को पूरी तरह न उजाड़ें : जयप्रकाश पुरोहित
वरिष्ठ समाजसेवी जयप्रकाश पुरोहित ने कहा कि यदि विकास कार्य के लिए कुछ जमीन की आवश्यकता है तो शासन उतनी जमीन ले सकता है, लेकिन पूरे परिवारों को उनके व्यवसाय से बेदखल करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर में कई परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। उनके पास रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेज हैं। नगरवासी भी विकास चाहते हैं, लेकिन ऐसा विकास नहीं चाहते जिसमें उनके घर और रोजगार ही समाप्त हो जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि दुकानों को हटाना जरूरी हो तो प्रभावित लोगों के लिए उसी क्षेत्र में व्यवस्थित दुकानें बनाकर दी जाएं, ताकि उनके परिवारों का पालन-पोषण चलता रहे।

आश्वासन के बाद फिर कार्रवाई से भयभीत हैं लोग : पार्षद चंपाबाई
नगर परिषद पार्षद चंपाबाई ने कहा कि नगरवासियों ने पूर्व में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों पर विश्वास करते हुए आंदोलन समाप्त किया था। उस समय उन्हें आश्वासन दिया गया था कि ममलेश्वर क्षेत्र से संबंधित प्रस्ताव के लिए अन्य स्थान पर व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब दोबारा कार्रवाई की बात सामने आने से नगर के लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। यदि इसी तरह की कार्रवाई आगे बढ़ती है तो नगरवासी एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर एकजुट हुआ नगर
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ओंकारेश्वर के लोगों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के बजाय इसे नगर के अस्तित्व, रोजगार और भविष्य से जुड़ा विषय बताया। बैठक में मौजूद लोगों ने कहा कि उन्हें विकास से कोई आपत्ति नहीं है। ओंकारेश्वर देश-दुनिया की आस्था का बड़ा केंद्र है और यहां सड़क, यातायात, स्वच्छता, मंदिर क्षेत्र का विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ना जरूरी है। लेकिन विकास की योजना बनाते समय उन परिवारों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा, जिनकी पीढ़ियां इसी तीर्थनगरी में रहकर अपना जीवनयापन करती आई हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले नगरवासियों के साथ खुला संवाद करना चाहिए। जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, उनके मामलों की अलग-अलग जांच होनी चाहिए और जिन परिवारों के रोजगार प्रभावित होंगे, उनके पुनर्वास तथा वैकल्पिक व्यवसाय की ठोस व्यवस्था पहले तय की जानी चाहिए।

अब सवाल कार्रवाई का नहीं, संवाद और समाधान का
ओंकारेश्वर में मंगलवार की बैठक के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विकास की योजना नगरवासियों को साथ लेकर बनाई जाएगी या कार्रवाई के माध्यम से। नगरवासी चाहते हैं कि शासन-प्रशासन उनके साथ बैठकर पूरे मामले का समाधान निकाले। उनका स्पष्ट कहना है—विकास हो, तीर्थनगरी का विस्तार हो, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें, लेकिन वर्षों से बसे परिवारों के घर और रोजगार उजाड़कर नहीं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन पूर्व में दिए गए लिखित आश्वासन पर क्या रुख अपनाता है और नगरवासियों की मांगों पर संवाद के लिए कोई ठोस पहल करता है या नहीं। 
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