उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली में मां बिरासिनी देवी मंदिर का इतिहास किसी लोककथा से कम नहीं लगता। मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पहले माता ने धौकल नामक एक व्यक्ति को स्वप्न में दर्शन दिए और बताया कि उनकी प्रतिमा एक खेत में दबी हुई है। यह कोई सामान्य सपना नहीं था, बल्कि एक दिव्य संकेत था। धौकल ने जब उस स्थान पर खुदाई करवाई तो सचमुच वहां से माता की प्रतिमा प्राप्त हुई। इसके बाद श्रद्धा भाव से एक छोटी मढ़िया बनाकर माता की स्थापना की गई। यही वह क्षण था, जहां से इस शक्तिपीठ की नींव पड़ी और धीरे-धीरे यह स्थान लोगों की आस्था का केंद्र बनता चला गया।
राजा बीरसिंह और मंदिर निर्माण की विरासत
समय के साथ मां बिरासिनी की ख्याति दूर-दूर तक फैलने लगी। नगर के राजा बीरसिंह ने इस स्थल के महत्व को समझते हुए यहां भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उस दौर की आस्था और संस्कृति का प्रतीक बन गया। बाद के वर्षों में मंदिर का महत्व लगातार बढ़ता गया और श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि होती रही।
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