महेश्वर के ऐतिहासिक शारदा सदन ग्रंथालय को साड़ी दुकान में बदलने के प्रशासनिक आदेश से नगरवासियों में आक्रोश है। जनता इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत पर हमला मान रही है और धरना प्रदर्शन कर रही है। विरोध के बीच प्रशासन से ग्रंथालय यथास्थान बनाए रखने की मांग की जा रही है।
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महेश्वर में ऐतिहासिक धरोहर को बचाने विरोध में उतरे लोग
- फोटो : अमर उजाला
शारदा सदन ग्रंथालय, महेश्वर की ऐतिहासिक धरोहर, को प्रशासन द्वारा साड़ी दुकान में बदलने की योजना से नगरवासियों में आक्रोश है। जनता इसे संस्कृति पर हमला मानकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। प्रशासनिक आदेश के खिलाफ धरना जारी है, और ग्रंथालय को बचाने हेतु संघर्ष जारी रहेगा।
बता दें कि देवी अहिल्या की नगरी में स्थित शारदा सदन ग्रंथालय 1872 में निर्मित एक ऐतिहासिक भवन है, जो शिक्षा और समाजसेवा के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। यह भवन न केवल नगर के बौद्धिक विकास का केंद्र रहा है, बल्कि जनहित और आत्मनिर्भरता के कई कार्यों का साक्षी भी रहा है। इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को देखते हुए इसका संरक्षण किया जाना आवश्यक है, लेकिन हाल ही में खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल के आदेश के बाद इस ग्रंथालय को अन्यत्र स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे नगरवासियों में गहरा आक्रोश है।
जनहित और स्वावलंबन का केंद्र
लोगों ने बताया कि शारदा सदन ग्रंथालय केवल एक पुस्तकालय नहीं है, बल्कि इसे हमेशा जनहित और स्वावलंबन को बढ़ावा देने वाले एक सामाजिक केंद्र के रूप में भी जाना जाता रहा है। जब नगर में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था, तब इसी भवन में नगर समिति द्वारा शासकीय अस्पताल का संचालन किया गया था। इसके अलावा, 1960 के दशक में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मिसाल कायम करते हुए छुटियां भुवाजी, तुलसा भुवाजी और श्रीमती गुप्ता ने जनसहयोग से यहां सिलाई केंद्र स्थापित किया था, जिससे कई महिलाएं स्वावलंबी बनीं। इस तरह, यह भवन केवल एक भौतिक संरचना नहीं, बल्कि महेश्वर की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का अहम हिस्सा है।
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महेश्वर में ऐतिहासिक धरोहर को बचाने विरोध में उतरे लोग
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ग्रंथालय स्थानांतरण का निर्णय इतिहास पर आघात
नगरवासियों का मानना है कि शिक्षा और ज्ञान के प्रतीक इस ग्रंथालय को स्थानांतरित करने का निर्णय मुगल काल की उस सोच की याद दिलाता है, जब नालंदा विश्वविद्यालय को जला दिया गया था और हजारों अमूल्य पांडुलिपियां नष्ट कर दी गई थीं। महेश्वर की जनता इस फैसले को अपनी सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा के प्रति उदासीनता के रूप में देख रही है। नगर के विद्वानों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि ग्रंथालयों का संरक्षण आवश्यक है ताकि युवा पीढ़ी को अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ा जा सके।
ग्रंथालय हटाकर साड़ी दुकान खोलने की योजना
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पर्यटन सुविधा केंद्र एवं ग्रंथालय के रूप में इस भवन के पुनर्निर्माण का उद्घाटन किया था, जिससे नगरवासियों को यह विश्वास हुआ कि यह स्थल भविष्य में भी साहित्य, ज्ञान और अध्ययन के लिए उपयोगी रहेगा। लेकिन खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल के मौखिक आदेश के अनुसार, इस ग्रंथालय को यहां से हटाकर इसकी जगह साड़ी दुकान खोलने की योजना बनाई जा रही है। नगरवासियों का कहना है कि यह आदेश एक प्रकार से उनके संस्कार, इतिहास और विरासत पर कुठाराघात के समान है।
इस निर्णय के खिलाफ नगर की जनता और ग्रंथालय संचालन समिति के सदस्य लगातार विरोध कर रहे हैं। पर्यटन सुविधा केंद्र एवं ग्रंथालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन जारी है। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि ग्रंथालय को नगर से दूर वृद्धाश्रम में स्थानांतरित कर दिया जाए, जिससे नगरवासियों में असंतोष बढ़ गया है।
जनता की नाराजगी और विरोध प्रदर्शन
ग्रंथालय को हटाने के आदेश से नाराज नगरवासियों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। शारदा सदन ग्रंथालय संचालन समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह ग्रंथालय महेश्वर की जनता की संपत्ति है और इसे किसी भी कीमत पर स्थानांतरित नहीं होने दिया जाएगा।
नगर परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार, 2019 में जब पुराना भवन जीर्ण-शीर्ण हो गया था, तब इसे तोड़ने और नया भवन बनाने की अनुमति दी गई थी। सरकार द्वारा इसे पर्यटन सुविधा केंद्र एवं ग्रंथालय का नाम देकर जनता को समर्पित किया गया। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसे हटाने का प्रयास जनता की भावनाओं का अनादर है।
महेश्वर में ऐतिहासिक धरोहर को बचाने विरोध में उतरे लोग
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प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल और जनता की प्रतिक्रिया
नगरवासियों के विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन का एक प्रतिनिधिमंडल ग्रंथालय समिति के सदस्यों से वार्ता के लिए आया। इसमें सीईओ जिला पंचायत खरगोन आकाश सिंह, एसडीएम अनिल जैन, सीईओ महेश्वर रीना चौहान, तहसीलदार राकेश सस्तीय और नगर परिषद की सीएमओ प्रियंका पंडियां शामिल थे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रंथालय को बाजार चौक से वृद्धाश्रम स्थानांतरित करने की बात दोहराई, लेकिन नगरवासियों ने इसका कड़ा विरोध किया। संस्थान संरक्षक जितेंद्र नेगी ने कहा कि यह हमारे पूर्वजों की संपत्ति है, इसे हम किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। वहीं, संस्थान के सदस्य मनोज पाटीदार ने कहा कि यदि शासन द्वारा इस भवन के निर्माण में कोई राशि खर्च हुई है, तो नगरवासी उसे चंदे के रूप में एकत्र कर सरकार को लौटा देंगे, लेकिन ग्रंथालय को अन्यत्र स्थानांतरित नहीं होने देंगे।
क्या प्रशासन जनता की भावनाओं का सम्मान करेगा?
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन जनता की मांगों पर ध्यान देगा और ग्रंथालय को यथास्थान संचालित होने देगा, या फिर प्रशासनिक आदेशों के तहत इसे स्थानांतरित कर दिया जाएगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन नगरवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी हाल में इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे।
नगरवासियों की अपील
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने कहा कि यह ग्रंथालय महेश्वर की सांस्कृतिक धरोहर है और इसे स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एडवोकेट एवं संस्थान संरक्षक जितेंद्र नेगी ने कहा कि यदि प्रशासन ने इसे हटाने का प्रयास किया, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। संस्थान के सदस्य मनोज पाटीदार ने प्रशासन से आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखा जाए और जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाए।
सद्बुद्धि के लिए जलाए दीपक
शनिवार रात 9 बजे धरना स्थल पर उपस्थित नगरवासियों ने देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर प्रशासनिक अधिकारियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक ग्रंथालय को यथास्थान बनाए रखने का निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।