भारतवर्ष में बारह ज्योतिर्लिंग हैं, जिनमें चतुर्थ ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक और पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में स्थापित हैं। मान्यता है कि प्रभु श्री राम से 14 पीढ़ी पूर्व मांधाता राजा हुए थे, जिनकी तपस्या से ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर यहां प्रकट हुए हैं। यहां स्थित ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्राचीन समय से ही अखंड दीप प्रज्वलित है, जिसमें एक ही दीपक में तीन बातीं प्रज्वलित की जाती हैं, जो कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश भगवान को समर्पित हैं।
यहां ओंकार पहाड़ी पर सात किलोमीटर का ओंकार पथ परिक्रमा मार्ग है। यह पूरा पर्वत ही ओम आकर में बना है। यही नहीं, जिस पर्वत पर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं, वह पर्वत स्वयं भी शिवलिंग की आकृति में स्थापित है। इसके चारों ओर मध्य प्रदेश की जीवनदायनी मां नर्मदा नदी बहती है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर धार्मिक मान्यता है कि बाबा महाकाल दिनभर अखिल ब्रह्मांड में विचरण करते हैं। वे रात्रि विश्राम ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग धाम में ही करते हैं। इसी के चलते भोले बाबा के शयन के लिए यहां रोजाना रात्रि के समय झूला, पालना, चौपड़ और पासे बिछाए जाते हैं। वहीं मान्यता अनुसार रात्रि विश्राम के बाद सुबह 3:00 बजे उठकर बाबा महाकाल उज्जैन स्थित महाकालेश्वर धाम जाते हैं। जहां वे स्नान करते हैं। इसलिए वहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है, लेकिन ओंकारेश्वर की शयन आरती प्रसिद्ध है।