ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में प्रस्तावित ममलेश्वर महालोक योजना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने संकेत दिए हैं कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा, लेकिन महालोक निर्माण के तय स्थान को लेकर स्थानीय नागरिकों, संत समाज और जनप्रतिनिधियों में गहरा असंतोष उभर आया है। विरोध के स्वर तीव्र होते जा रहे हैं और अब यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाला है।
राज्य सरकार द्वारा 136 करोड़ की लागत से ममलेश्वर लोक निर्माण किया जाएगा। इसमें करीबन 300 मकान, होटल, दुकान, मठ, मंदिर, आश्रमों को तोड़ा जाएगा। पूरी ब्रह्मपुरी को खाली करवाने की सरकार की पूरी योजना है। लोगों ने कहा कि हम कई वर्षों से यहां रह रहे हैं। रोजी-रोटी व्यापार व्यवसाय सब यहीं से चलता है। सरकार द्वारा यहां पर जो ममलेश्वर लोक का निर्माण किया जाएगा, वह लोगों के घर बार परिवारों को उजाड़ के बनाया जाएगा, क्या यह सब न्यायोचित है?
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जनप्रतिनिधियों की आपात बैठक, इस्तीफे की चेतावनी
ममलेश्वर लोक की प्रस्तावित स्थल चयन को लेकर ओंकारेश्वर में कांग्रेस एवं भाजपा दोनों दलों के पार्षदों, संतजनों और समाजसेवियों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से आक्रोश प्रकट करते हुए कहा गया कि यदि ममलेश्वर लोक का स्थान परिवर्तित नहीं किया गया तो नगर के समस्त जनप्रतिनिधि अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा देंगे और आंदोलन शुरू करेंगे।
बैठक में पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अंतरसिंह बारे, नेता प्रतिपक्ष राजेश यादव, पार्षद रोमी चौकसे, चंपाबाई, गंगाराम पंचोली, पार्षद पति सुनिल सोने, गोपाल खंडेलवाल, प्रेमलाल गवले, पूर्व पार्षद दिनेश पेंटर, नगर भाजपा अध्यक्ष संतोष वर्मा तथा महंत मंगलदास त्यागी, अध्यक्ष षट् दर्शन संत मंडल, सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि ममलेश्वर लोक का निर्माण धार्मिक परंपरा और स्थानीय भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए, न कि केवल प्रशासनिक सुविधा के आधार पर।