राजबाड़ा के समीप दुर्गा देवी का प्राचीन मंदिर है। यह नगर के अति प्राचीन देवी मंदिरो में से एक है। होलकर राजाओं का मुख्य कार्य स्थल और प्रशासनिक क्षेत्र राजबाड़ा होने से देवी देवताओ के प्राचीन मंदिर भी इसी क्षेत्र में हैं। दुर्गा देवी मंदिर का निर्माण करीब 244 साल पहले किया गया था। होलकर महाराजा मल्हारराव होलकर और उनके बाद रहे महाराजा भी यहां देवी के समक्ष शीश नवाने आते थे।
2017 में हुआ जीर्णोद्धार
दुर्गा देवी मंदिर मराठा स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट नमूना है। मंदिर की बनावट देखकर जाहिर होता है कि मंदिर प्राचीन काल का है। जीर्णशीर्ण होने के कारण 2017 में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की विशेष रूचि के चलते इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया और मंदिर को पुन: भव्य स्वरूप प्रदान किया गया। जीर्णोद्धार में मंदिर का गर्भगृह, मंदिर सिंहासन, ऊपर का हिस्सा, परिक्रमा मार्ग के साथ मूर्तियां की पुनः स्थापना की गई थी। इस कार्य से मंदिर का प्राचीन वैभव फिर दिखने लगा।
मंदिर के पूजन कार्य देखने वाले पुजारी के अनुसार यह मंदिर करीब 244 वर्ष (1781) का निर्मित है। वर्ष 1781 के फागुन माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मूर्ति स्थापित की गई, इसलिए होली के दो दिन पहले मंदिर का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इंदौर के इतिहास की उपलब्ध पुस्तकों में ऐसी कोई जानकारी प्राप्त नहीं होती है। इतिहास की कुछ पुस्तकों में इस मंदिर की स्थापना का काल महाराजा मल्हारराव होलकर द्वितीय (1811-1833) के कार्यकाल में मंदसौर संधि और इंदौर के राजधानी बनने के बाद होने का उल्लेख है।
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