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Indore: कृषि कॉलेज की जमीन बचाने के लिए छात्र जुटाएंगे चंदा, सीएम को भेजेंगे 50 प्रतिशत राशि

Thu, 04 Aug 2022 04:55 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

Indore: कृषि कॉलेज की जमीन बचाने के लिए छात्र जुटाएंगे चंदा, सीएम को भेजेंगे 50 प्रतिशत राशि
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इंदौर के कृषि महाविद्यालय की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। - फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर कृषि महाविद्यालय की जमीन बचाने की मांग को लेकर बीते 15 दिनों से छात्रों द्वारा आंदोलन किया जा रहा है। कई संगठनों का समर्थन भी प्राप्त हो रहा है। अलग-अलग तरीके से विरोध किया जा रहा है। अब चार अगस्त को विरोध कर रहे छात्र चंदा इकट्ठा करेंगे। 

जानकारी देते हुए कॉलेज के पूर्व छात्र नेता रणजीत रघुनाथ ने बताया कि छात्रों ने तय किया है कि वह आज कृषि महाविद्यालय चौराहा, एमवाय चौराहा, पलासिया चौराहा, रीगल चौराहा, राजवाड़ा एवं भंवरकुआं चौराहे पर चंदा इकट्ठा करेंगे। कॉलेज के अंकुरण एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राधे जाट ने कहा कि एक चौराहे पर 30 से 40 छात्र चंदा इकट्ठा करेंगे एवं इंदौर की जनता से जो चंदा मिलेगा उस चंदे को मुख्यमंत्री को 50 प्रतिशत, कलेक्टर को 30 प्रतिशत एवं मंत्री कमल पटेल को 30 प्रतिशत दे देंगे। 
 
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छात्रों ने कलेक्टर कार्यालय में घेराव किया। - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कुछ दिन पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोग भी आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे थे। सभी ने कलेक्टर कार्यालय में घेराव किया। छात्रों ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की, ज्ञापन दिया। छात्रों की मांग थी कि कलेक्टर एकबार हमारी बात सुनें। अधिकारियों ने समझाइश भी दी। आखिर में जब कोई नहीं पहुंचा तो छात्रों ने दीवार को ज्ञापन पढ़कर सुनाया और ज्ञापन वहीं चिपका दिया। 
 
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कॉलेज की जमीन के लिए चल रहे आंदोलन के बीच विधायक हीरालाल अलावा भी पहुंचे थे। - फोटो : सोशल मीडिया
कॉलेज की जमीन के लिए चल रहे आंदोलन के बीच विधायक हीरालाल अलावा भी पहुंचे थे। उन्होंने इंदौर क़ृषि महाविद्यालय में डीन एसके चौधरी से मुलाक़ात की। कॉलेज और छात्रों की समस्याओं के बारे में जानकारी ली। अलावा ने कहा कि मध्यप्रदेश मे इंदौर मालवा निमाड़ क्षेत्र में एक मात्र क़ृषि महाविद्यालय होने के बावजूद सरकार का ध्यान क़ृषि अनुसंधान की तरफ नहीं के बरबर है।  मध्यप्रदेश सरकार से जयस मांग करता है कि इंदौर क़ृषि महाविधायलय को विश्व विद्यालय का दर्जा दिया जाए, साथ ही कॉलेज का प्रति वर्ष कम से कम 50 करोड़ का बजट निर्धारित किया जाए। साथ में किसी भी कीमत पर क़ृषि महाविद्यालय के अनुसंधान की जमीन निजी हाथों में नहीं सौंपी जानी चाहिए।

अलावा ने कहा कि 25 हजार करोड़ कि जमीन को भूसे के भाव में दिया जा रहा हैं। इस आंदोलन में जयस सहभागी बनकर उनके साथ कंधे से कंधा मिलकर चलेगा। सरकार बात नही मानती तो बड़े आंदोलन की ओर हम सभी मिलकर रूपरेखा बनाएंगे। 

बता दें कि कृषि महाविद्यालय की जमीन को स्मार्ट सिटी के नाम पर, सिटी फॉरेस्ट के नाम पर लेने की कोशिश की जा रही है। इसके संबंध में शासन के अपर सचिव ने बीते दिनों जिला प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन के साथ मीटिंग भी की थी। कृषि कॉलेज को कहीं और शिफ्ट करने की भी योजना है। 
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