इंदौर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों को देखते हुए यातायात पुलिस ने एक और सख्त कदम उठाया है। शहर के 15 प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी अब बॉडी वॉर्न कैमरों के साथ तैनात किए जा रहे हैं। इन कैमरों से सिग्नल जम्प और अन्य ट्रैफिक नियम उल्लंघनों की रिकॉर्डिंग की जा रही है और आईटीएमएस को भेजकर तत्काल चालानी कार्रवाई की जा रही है। आज से इंदौर में पेंडिंग चालान वालों की गाड़ियां जप्त करना भी शुरू कर दी गई हैं। ट्रैफिक पुलिस ने चार गाड़ियां पकड़ ली हैं, जिनके दस से अधिक चालान पेंडिंग हैं।
विज्ञापन
2 of 4
नगर निगम पर सिग्नल नहीं होने से वाहन चालक आमने सामने आ जाते हैं।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
ये है नया प्रयोग
एडिशनल ट्रैफिक डीसीपी संतोष कौल ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस ने उन चौराहों को चिन्हित किया है जहां सबसे ज्यादा नियम तोड़े जाते हैं और आईटीएमएस द्वारा चालान बनते हैं। जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हर ट्रैफिक जोन से 4-4 प्रमुख चौराहों को चुना गया है। इन पर सबसे कुशल ट्रैफिक टीमों की ड्यूटी लगाई गई है। इन सभी ट्रैफिक जवानों को बॉडी वॉर्न कैमरा पहनना अनिवार्य किया गया है ताकि हर स्थिति की निगरानी की जा सके। साथ ही, नियम तोड़ने वालों की तस्वीरें मोबाइल कैमरों से भी लेकर आईटीएमएस पोर्टल को भेजी जाएंगी। कुछ ऐसे चौराहे भी चयनित किए गए हैं जहां आईटीएमएस कैमरे नहीं हैं, जिससे इन बॉडी कैमरों की अहम भूमिका और बढ़ जाती है।
विज्ञापन
3 of 4
यहां पर कभी ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी नहीं रहते।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
एक हफ्ते की विशेष निगरानी
यातायात पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान एक हफ्ते तक लगातार चलाया जाएगा। पूरे सप्ताह की मॉनिटरिंग के बाद परिणामों की समीक्षा की जाएगी और फिर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
पहले भी हो चुका है प्रयोग
इससे पहले भी इंदौर पुलिस ने ‘रियल टाइम एक्शन’ मॉडल के तहत चालानी कार्रवाई की थी, जिसमें एक चौराहे पर नियम तोड़ने वाले की सूचना अगले चौराहे पर तैनात टीम को दी जाती थी। वहां पुलिस उसे रोककर चालान करती थी। हालांकि संसाधनों की कमी और वीआईपी मूवमेंट के चलते यह मॉडल ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाया था। इस अभियान का मकसद शहर में ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सड़क हादसों में कमी लाना है। अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो इसे पूरे शहर में लागू किया जाएगा।