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Dhar Bhojshala: आज आ सकता है भोजशाला का फैसला, 6 अप्रैल से 12 मई तक चली थी सुनवाई

Fri, 15 May 2026 08:19 AM IST
Dinesh Sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

धार भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ आज अहम फैसला सुना सकती है। 13 वर्षों से लंबित मामले में हिंदू, मुस्लिम और जैन पक्षों ने अपने-अपने दावे रखे। एएसआई की 98 दिन की सर्वे रिपोर्ट में परमारकालीन संरचना और पुरातात्विक अवशेषों का उल्लेख किया गया है।

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धार भोजशाला मामले पर शुक्रवार को फैसला आ सकता है। - फोटो : अमर उजाला
धार भोजशाला मंदिर है या मस्जिद, यह आज तय होने की संभावना है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस मामले में पांच जनहित याचिकाएं सुनीं। 24 दिन तक सभी पक्षों ने अपने अपने अपने तर्क रखे और दो दिन पहले कोर्ट से अंतिम सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज फैसला सुनाया जा सकता है। 

कोर्ट में इस साल 6 अप्रैल से इस मामले में सुनवाई हुई थी, जो 12 मई  तक चली। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी यह फैसला सुनाएंगे। इसके बाद तय होगा कि भोजशाला मंदिर है या मस्जिद।
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धार भोजशाला। - फोटो : अमर उजाला
भोजशाला मामले में 13 साल से सुनवाई चल रही है। पांच जनहित याचिकाओं में से दो हिंदू पक्ष ने, एक मस्जिद पक्ष ने, एक जैन समाज ने और एक रहवासियों ने दायर की है। हिंदू पक्ष ने  भोजशाला को मंदिर घोषित करने और हिंदुओं को हर दिन पूजा का अधिकार मांग है। उधर मस्जिद पक्ष इसे मस्जिद घोषित करने और नमाज की अनुमति मांग रहा है। जैन समाज भोजशाला को जैन मंदिर बताया और कहा कि यहां अंबिका देवी की मूर्ति स्थापित थी। इसके साथ ही जैन समाज ने पूजा का अधिकार मांगा।

ये भी पढ़ें- Dhar Bhojshala: भोजशाला मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने रखा आदेश सुरक्षित

 
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धार भोजशाला को लेकर 1952 से बढ़ने लगा तनाव - फोटो : अमर उजाला
एएसआई ने किया 98 दिनों तक सर्वे
हाई कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने भोजशाला परिसर में  पिछले साल 98 दिन सर्वे किया और दो हजार पेज को सर्वे रिपोर्ट पेश की। सर्वे के दौरान भोजशाला में मिली मूर्तियां, शिलालेख, सिक्के इत्यादि का उल्लेख भी अपनी रिपोर्ट में किया और निर्माण संरचना को 12वीं शताब्दी का बताया। केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भी अपना पक्ष रखा। अफसरों ने कोर्ट को बताया कि इस स्थल पर परमार राजाओं के शासनकाल का एक विशाल ढांचा मौजूद था और वर्तमान निर्माण भी उसी पत्थरों से किया गया। इस सर्वे पर मुस्लिम पक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और सर्वे को गलत बताया। इस पक्ष ने सर्वे की वीडियोग्राफी भी मांगी थी, जो कोर्ट के निर्देश पर दी गई।

एएसआई ने दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्राप्त स्थापत्य अवशेष, मूर्तियों के खंड, साहित्यिक ग्रंथों वाले बड़े शिलालेख, स्तंभों पर नागकर्णिका अभिलेख आदि इस बात का संकेत देते हैं कि इस स्थल पर साहित्यिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा एक बड़ा ढांचा मौजूद था। वैज्ञानिक जांच और उत्खनन में मिले पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर इस पूर्ववर्ती संरचना को परमार काल का माना जा सकता है।
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