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Dewas News: भाजपा में बगावत, जिलाध्यक्ष-महामंत्री का पुतला फूंका, टिकट बेचने के आरोप, महिला नेत्रियां भी उपेक्षा से नाराज

Fri, 17 Jun 2022 07:49 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास

सार

देवास भाजपा में बगावत के सुर उठने लगे हैं। पार्षदों के टिकट वितरण के बाद असंतोष चरम पर है। जिलाध्यक्ष और महामंत्री के पुतले फूंके गए। उन पर टिकट बेचने के आरोप लगे। उपेक्षा से महिला नेत्रियां नाराज हैं। भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी है। 
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नाराज लोगों ने जिलाध्यक्ष और जिला महामंत्री का पुतला जलाया - फोटो : सोशल मीडिया
नगर निगम चुनाव भाजपा के लिए मुसीबत बन गए। पहले प्रत्याशी के चयन में भाजपा में खींचतान हुई तो प्रत्याशियों के एलान के बाद और परेशानी बढ़ गई। देवास में संभवतः पहली बार ऐसा हुआ जब पार्षद प्रत्याशियों की सूची जारी होने पर जिलाध्यक्ष और जिला महामंत्री पर टिकट बेचने के आरोप लगाए गए। दोनों पदाधिकारियों के पुतले जलाए गए। कुछ ने यहां तक कहा कि हमारे वार्ड में जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री का आना मना है। आरोप लगे कि पार्टी की सारी गाइडलाइन ताक पर रख दी गई और खुद को आगे रखने के चक्कर में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई। सबसे ज्यादा नाराजगी उन महिला नेत्रियों में देखी गई जो सालों से पार्टी के लिए समर्पित होकर चप्पलें घिसतीं रही मगर जब टिकट की बारी आई तो नेताओं की पत्नी को उपकृत कर दिया गया। अब भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी है, मगर जो बगावत के स्वर उठ रहे हैं उससे महापौर प्रत्याशी घबरा गए हैं क्योंकि इस बगावत की आंच महापौर उम्मीदवार तक भी पहुंचेगी।
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इस तरह की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई - फोटो : सोशल मीडिया

भाजपा ने गुरुवार को 45 वार्डों के पार्षद प्रत्याशी घोषित किए। हालांकि इसकी सूची बुधवार को ही लगभग तय होकर कुछ भाजपा नेताओं के पास आ चुकी थी और सोशल मीडिया पर मैसेज चलने लगे थे। बधाइयों और स्वागत का सिलसिला भी चल पड़ा था मगर कुछ नामों को लेकर विरोध हुआ तो सूची होल्ड कर दी गई। बाद में प्रदेश कार्यालय से सूची जारी की गई। सूची जारी होते ही विरोध की चिंगारी भड़की जो आग बन गई। कई वार्डों में नए नाम दिए गए तो कुछ में विवादित नामों को जगह दी गई। पुराने नामों को काटा गया तो समर्थकों को एडजस्ट किया गया। एक तरफ तो हिंदुत्व की बात की गई तो दूसरी तरफ मोदी सरकार का विरोध करने वालों को पार्षद का टिकट दे दिया गया। इन सब बातों के चलते इस तरह से विरोध हुआ कि संगठन निशाने पर आ गया। पैलेस का भी विरोध हुआ। 
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विमल शर्मा ने फेसबुक पर की पोस्ट, जिसमें झलकी नाराजगी - फोटो : सोशल मीडिया

पूर्व महापौर पूरी तरह साइडलाइन
हैरानी की बात रही कि पूरी सूची में भाजपा के नेता, पूर्व महापौर रहे सुभाष शर्मा को पूरी तरह साइड लाइन कर दिया गया। उनके बेटे विमल शर्मा ने अपनी पत्नी रीता के लिए महापौर का टिकट मांगा था मगर नाकाम रहे। इसके बाद जब पार्षदी की बारी आई तो 26 नंबर वार्ड से उनका टिकट काटकर महापौर की दावेदारी कर लगभग तय हो चुके पैलेस के वफादार रवि जैन को दे दिया गया। दुर्गेश अग्रवाल के नाम के कारण जैन का टिकट कटा था तो उनको दूसरी जगह एडजस्ट करना पैलेस की मजबूरी हो गई थी। इसके बाद विमल शर्मा ने इसी वार्ड से शुक्रवार को नामांकन दाखिल कर दिया। वे निर्दलीय लड़ेंगे या नाम वापस लेंगे इसे लेकर अब बहस हो रही है लेकिन इस फैसले ने जता दिया है कि शर्मा अब पैलेस की पसंद नहीं रहे हैं औऱ उनके अपनी कार्य़शैली के चलते पैलेस उनसे नाराज हुआ है वरना उनको पार्षद से लेकर सभापति और महापौर तक सबकुछ पैलेस की अनुकंपा से ही हासिल हुआ था लेकिन बीच में वे इतने विवादों में  घिरे कि उन्हें पार्षद तक के टिकट से मोहताज होना पड़ा।

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भाजपा नेता आदित्य दुबे ने निर्दलीय के रूप में भरा नामांकन - फोटो : सोशल मीडिया

निर्दलीय बिगाड़ेंगे गणित
भाजपा में टिकट वितरण के बाद शुरू हुई बगावत से अब पार्टी की नींद उड़ी हुई है। संगठन और पैलेस दोनों ही डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। शुक्रवार को जिलाध्यक्ष दिनभर लोगों को समझाते रहे। हालांकि विरोध की यह चिंगारी आसानी से बुझती नजर नहीं आ रही है और कहा जा रहा है कि इस बार वार्डों से निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा का गणित बिगाड़ेंगे। कई वार्डों में निर्दलीयों के लड़ने की स्थिति साफ है तो कुछ में विचार चल रहा है।

बगावत से डर रहे भाजपा प्रत्याशी 
भाजपा के खिलाफ हुई बगावत से महापौर प्रत्याशी डरे हुए हैं। वार्डों में बगावत हुई तो भाजपा का नुकसान होगा। इधर कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार रमेश व्यास को टिकट देकर ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध मारी है तो मुस्लिम वोटरों का समर्थन हासिल किया है। शुक्रवार को नामांकन रैली में कांग्रेस कार्यकर्ता उत्साहित नजर आए और अच्छी खासी भीड़ जुटी। भाजपा में विरोध के स्वर उठ रहे हैं जिस कारण पार्टी के कार्यकर्ता दबीजुबान चर्चा कर रहे हैं कि यदि विरोध नहीं थमा तो दिक्कत आ सकती है। शनिवार को भाजपा प्रत्याशी की नामांकन रैली है और इसमें भीड़ जुटाने की कोशिश की जा रही है ताकि ठीक संदेश जाए मगर कार्यकर्ताओं के मन में जो पीड़ा है उसको पढ़ने में भाजपा नाकाम नजर आ रही है।
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भाजपा नेता अजय शर्मा ने जताई नाराजी - फोटो : सोशल मीडिया

जिलाध्य़क्ष-जिला महामंत्री का पुतला फूंका, टिकट बेचने के आरोप
पार्षद प्रत्याशियों की सूची सामने आते देर रात को विरोध हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग पोस्ट शेयर कर विरोध जताया। वार्ड 34 में राजेश यादव का टिकट काटकर राम यादव को दिया तो राजेश यादव के समर्थक नाराज हुए। जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल और जिला महामंत्री राजेश यादव का पुतला जलाया। आरोप लगाए कि जिलाध्यक्ष और जिला महामंत्री ने टिकट बेचा है। एक पोस्ट में दूसरे वार्ड के कार्य़कर्ता ने लिखा कि मेरे वार्ड में जिलाध्यक्ष और जिला महामंत्री का आना मना है। विमल शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई तो  वार्ड 10 के अजय शर्मा की नाराजगी भी झलकी। इसी तरह अन्य वार्डों में ये स्थिति बनी और भाजपा संगठन निशाने पर आया। सबसे हैरानी एक वार्ड में हुआ जहां आरोप लगे कि ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया है जिसने सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर मोदी सरकार का विरोध किया था। कार्यकर्ता इस फैसले से नाराज दिखे।

सभापति की दौड़ के लिए बदला वार्ड
जिला महामंत्री राजेश यादव का नाम ऐनवक्त पर तय हुआ और वे वार्ड 12 के प्रत्याशी बने। इसके पीछे कयास लगाए कि महापौर प्रत्याशी पैलेस की पसंद का होने के बाद अब राजू की जोड़ी की निगाह सभापति पर है। इसलिए यादव ने  वार्ड बदला और 12 नंबर वार्ड में आ गए जबकि पूर्व में उनके नाम की चर्चा नहीं थी। यदि परिषद भाजपा की बनती है तो सभापति के लिए यादव का दावा मजबूत रहेगी। हालांकि कुछ दूसरे नाम भी सभापति की दौड़ में है लेकिन प्रदेशाध्यक्ष के करीबी यादव का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

महिला नेत्रियों की उपेक्षा, नेता पत्नियों को तवज्जो
टिकट वितरण में सबसे ज्यादा उपेक्षा भाजपा की महिला नेत्रियों की हुई। जो महिलाएं सक्रिय रूप से भाजपा का काम कर रहीं हैं उन्हें तवज्जो न देकर नेताओं की पत्नियों के नाम पर मुहर लगाई गई। बड़े नेताओं के दखल के कारण महिलाओं को उनके हक से वंचित होना पड़ा। अब ये महिलाएं दबीजुबान विरोध जता रहीं हैं। डॉ. मनीषा बापना ने प्रेसनोट जारी कर कहा कि वैसे तो भाजपा संगठन अपने कार्यकर्ताओं और वास्तविक रूप से सामाजिक सेवाओं में लगे संगठन के पदाधिकारियों को महत्व देने की बात करता है, लेकिन इस बार देवास में पार्टी की और से चुने गए प्रत्याशियों के मामले में उसके सारे सिद्धांत धराशायी नजर आ रहे हैं।  टिकटों के वितरण के मामले में लगता है कि संगठन ने कुछ जी हुजूरी करने वाले नेताओं को अपने भविष्य का कर्णधार बनाने का निश्चय किया है। इसमें वे लोग ज्यादा हैं जिनका जनता से सीधे कोई वास्ता नहीं और न ही देवास के विकास से। संगठन में दिन रात मेहनत करने वाली महिला मोर्चे की  कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। सालों साल से बिना किसी पद के संगठन के एक इशारे पर कार्य करने वाली जुझारू महिला कार्यकर्ताओं की उपेक्षा संगठन के दृष्टिकोण पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। सवाल उठता है संगठन के लिए खून पसीना एक कर देने वाले लोगों के प्रति यह उपेक्षा का भाव क्या पार्टी को मजबूती देग। क्या कार्यकर्ताओं की बजाय अब संगठन जी हुजूर लोगों की तरफदारी करने लगा है।
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