लहसुन के गिरते दामों से किसान चिंतित हैं। मप्र के देवास में किसानों ने बाइक रैली निकाली। किसान लहसुन की माला पहनकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। लहसुन के आयात पर रोक लगाने की मांग की।
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लहसुन की माला पहनकर कलेक्टोरेट पहुंचे किसान
- फोटो : सोशल मीडिया
लहसुन की लगातार गिरती कीमतें किसानों को रूला रही है। इस बार लहसुन का उत्पादन अधिक हुआ लेकिन दाम अपेक्षानुसार नहीं है। इस कारण किसान परेशान है। उनकी लागत तक नहीं निकल पा रही। इसे लेकर किसान अब सरकार से गुहार लगा रहे हैं। देवास में किसानों ने बाइक रैली निकाली और लहसुन की माला पहनकर विरोध प्रदर्शन किया।
दरअसल, लहसुन की लगातार गिरती कीमतों पर रोक लगाने व लहसुन के समर्थन मूल्य की मांग को लेकर युवा किसान संगठन द्वारा बाइक रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा गया। संगठन अध्यक्ष रविन्द्र चौधरी ने बताया कि ग्राम राजोदा से युवा किसान संगठन के तत्वावधान में 200 से अधिक किसान बाइक रैली के माध्यम से निकले। खेताखेड़ी, बरखेड़ा, नापाखेड़ी, हांपाखेड़ा, सिरोलिया, केलोद, बड़ा टिगरिया, छापरी, छोटा टिगरिया, कुमारिया, पारवती पुरा, नगोरा, सुकलिया, सुनवानी ,शिप्रा, लोहार पिपलिया होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जहां पदाधिकारियों व किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने लहसुन की माला पहनी और विरोध दर्शाया।
बाइक रैली निकालकर किसानों ने की नारेबाजी
- फोटो : सोशल मीडिया
चौधरी ने कहा कि अगर देश के दुश्मन चीन व ईरान से लहसुन के आयात पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई व ओपन ट्रेड (मुक्त बाजार) के नियम में सुधार नहीं किया गया तो किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। अगर किसान को आर्थिक नुकसान हुआ तो इसका खामियाजा प्रदेश के सत्ताधारी दल को आगामी पंचायत चुनाव में उठाना पड़ेगा। किसानों की मांग है कि लहसुन का चीन और ईरान समेत किसी भी देश से आयात पूरी तरह बंद किया जाए। लहसुन को एमएसपी की सूची में शामिल कर 8000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव सुनिश्चित करें। लहसुन के ऊपर सरकार की क्या निर्यात नीति है स्पष्ट करें व किसानों को प्रसारित करें। लहसुन की लागत कम करने हेतु किसानों को सस्ता खाद-बीज व कीटनाशक दवाइयां वाजिब दाम व समय पर उपलब्ध कराएं। लहसुन की लागत कम करने हेतु किसानों को टैक्स फ्री डीजल व पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए। यदि समय रहते उपरोक्त सुधार नहीं किए गए तो किसानों द्वारा प्रदर्शन किया जाएगा।