दस दिवसीय गणेशोत्सव पर्व का गुरुवार को समापन हो गया। अनंत चतुर्दशी पर्व के एक दिन पहले बुधवार को पंडालों में हवन, पूजन संपन्न हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। वहीं घरों में सुबह से लोगों के द्वारा हवन किया। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्यक्रम शुरू हुआ। दोपहर में छोटी-छोटी प्रतिमाएं तालाबों पर पहुंची और शाम होते ही बड़ी प्रतिमाएं चल समारोह के साथ घंटाघर पहुंची, जहां अखाड़ों के कलाकारों द्वारा प्रदर्शन किया गया। इसके बाद फुटेरा तालाब पर प्रतिमा विसर्जित हुईं। तालाब पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, साथ ही एसडीआरएफ के जवानों की ड्यूटी लगाई। लोगों ने गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के साथ गजानन को विदाई दी गई।
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विसर्जन के लिए घाट पर रखीं प्रतिमाएं
- फोटो : अमर उजाला
हवन,पूजन के बाद दी गई विदाई
गणेश चतुर्थी से भगवान गणपति की स्थापना के साथ दस दिवसीय धार्मिक आयोजन की शुरूआत हो गई थी और घरों के साथ पंडालों में भजन, कीर्तन चलता रहा। शाम होते ही पंडालों में लोग पहुंचकर भगवान गणेश की झांकी देखने जाते थे। गुरुवार को अनंत चतुर्दशी पर्व पर घरों में सुबह से हवन, पूजन करने के बाद कन्या भोज का आयोजन किया गया। इसके बाद प्रतिमाओं को तालाब पर ले जाकर विसर्जित किया गया। वहीं पंडालों में बुधवार की रात ही हवन कर लिया गया था और गुरुवार शाम से प्रतिमाओं को बड़े वाहन पर सवार कर विसर्जन के लिए चल समारोह के साथ निकाला गया।
फुटेरा तालाब पर प्रतिमा विसर्जित करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
घंटाघर पर हुआ अखाड़ों का प्रदर्शन
प्रतिमाओं के साथ चल रहे अखाड़ों के कलाकारों के द्वारा हैरत अंगेज करतब किए गए। यहां मौजूद अतिथियों के द्वारा प्रतिमाओं को पुरस्कार दिए। यह क्रम देर रात तक चलता रहा। चल समारोह घंटाघर से बकोली चौराहा, टॉकीज तिराहा, पुराना थाना होते हुए महाकाली चौराहा से फुटेरा तालाब पहुंचा जहां पुलिस और एसडीआरएफ टीम की मौजूदगी में प्रतिमाओं का विर्सजन किया गया। इसके अलावा बेलाताल और पुरेना तालाब पर भी प्रतिमाएं विसर्जित की गईं।