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MP News: जहां हर पत्थर के नीचे था नाग का वास, अब वहां मिले 11 हजार साल पुराने सात मंदिर; कलचुरी काल से है नाता

Sun, 19 Jan 2025 12:52 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दोनी गांव में कलचुरी शासक के समय के मंदिर और उनके बाजू में प्राचीन बावड़ी बनी है। जिसका जीर्णोधार पंचायत स्तर पर कराया गया है। बावड़ी खुदाई के दौरान हर पत्थर के नीचे नागदेवता का वास मिला था। जो विनती के बाद वहां से हटे थे। 
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दोनी गांव में सात मंदिरों के समूह खोजा गया। - फोटो : Amar Ujala
उत्तर प्रदेश के संभल और चंदौसी में की गई खुदाई में कई पुराने शिव मंदिर मिले हैं। जिनकी देश भर में चर्चा हुई। अब इसी तरह का नजारा मध्य प्रदेश के दमोह जिले में देखने को मिल रहा है। प्रदेश के पुरातत्व विभाग ने जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के दोनी गांव में सात मंदिरों के समूह को खोजा है। यह कलचुरी काल के मंदिर मिट्टी के टीले के नीचे दबे मिले हैं, जो नौवीं शताब्दी के माने जा रहे हैं। 

बता दें कि तेंदूखेड़ा पर्यटन और प्राचीन धरोहर के लिए प्रदेश भर में जाना जाता है। यहां आज भी राजा महाराजाओं के किले और मठ बने हुए हैं, लेकिन अनदेखी के कारण वे खंडहर का स्वरूप लेते जा रहे हैं। हालांकि, अब पुरातत्व विभाग तेंदूखेड़ा में ऐसी प्राचीन धरोहरों की खोज के लिए खुदाई कर रहा है। 
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दोनी गांव में सात मंदिरों के समूह खोजा गया। - फोटो : Amar Ujala
नौवीं शताब्दी के मिले मंदिर
तेंदूखेड़ा ब्लॉक के दोनी गांव में नौवीं शताब्दी के मठ और मंदिर बने हुए हैं। राज्य सरकार के पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इन मंदिरों का सर्वे पुरातत्व विभाग से कराया था। इसके बाद विभाग की ओर से मठ क्रमांक दो में जीर्णोधार का काम शुरू किया गया। इस दौरान की गई खुदाई में मिट्टी में दबे सात मंदिर मिले हैं। 
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दोनी गांव में सात मंदिरों के समूह खोजा गया। - फोटो : Amar Ujala
नए सिरे से बनेगा मंदिर
खुदाई के दौरान मिले मंदिरों से निकली मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रमेश यादव ने बताया कि खुदाई में जो प्रतिमाएं मिली हैं, उनका अस्सी प्रतिशत भाग सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि पुरातत्व विभाग के नियम के अनुसार खुदाई में मिली मूर्ति या किसी अन्य प्रकार के अवशेष अगर 80 फीसदी तक सुरक्षित मिलते हैं तो उन्हें नए सिरे से तैयार किया जाता है। ऐसे में दोनी गांव में मिले कलचुरी मंदिरों और प्रतिमाओं को नया रूप दिया जाएगा। खुदाई में निकली प्रतिमाओं को रानीदुर्गावती संग्रहालय जबलपुर और दमयंती संग्रहालय दमोह में रखा गया है।

हर पत्थर के नीचे नागदेवता का बास
दोनी गांव में कलचुरी शासक के समय के मंदिर और उनके बाजू में प्राचीन बावड़ी बनी है। जिसका जीर्णोधार पंचायत स्तर पर कराया गया है। बावड़ी खुदाई के दौरान हर पत्थर के नीचे नागदेवता का वास मिला था। बाद में पूजा कर नागदेवता से जाने के लिए कहा, उसके बाद उन्होंने अपना स्थान बदला, और फिर निर्माण कार्य शुरू किया गया। 

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दोनी गांव में सात मंदिरों के समूह खोजा गया। - फोटो : Amar Ujala
कई पत्थर मौके से गायब 
मंदिरों में लगे पत्थर स्थानीय सेंड स्टोन हैं, लेकिन उनकी बनावट और ऊंचाई अलग है। माना जा रहा है कि जो मंदिर खुदाई में मिले हैं, उनकी ऊंचाई 70 फीट रही होगी।   पुरातत्व विभाग की टीम का मानना है कि कल्चुरी शासनकाल के इन मंदिरों को लोकल स्थानीय लोगों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया। मंदिरों और मठों में लगे कई पत्थर मौके से गायब हैं।  
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दोनी गांव में सात मंदिरों के समूह मिला। - फोटो : Amar Ujala
तीन महीने से चल रही खुदाई
पुरातत्व विभाग की आयुक्त उर्मिला शुक्ला ने बताया कि विभाग की ओर से दोनी गांव में पिछले तीन महीने से खुदाई का काम कराया जा रहा है। अभी मठ क्रमांक दो की खुदाई हो रही है, जहां यह मंदिर मिले हैं। काम पूरा होने के बाद मठ क्रमांक एक का काम शुरू कराया जाएगा। 
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