मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बेरोजगारी के विरोध में थाली बजाकर रैली निकाली गई। इस अनोखे विरोध में आधा सैकड़ा से अधिक युवाओं, बेरोजगारों ने प्रदर्शन किया। ये युवा भारतीय बेरोजगार मोर्चा के बैनर तले हुए प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट कार्यालय, जिला पंचायत जनसुनवाई में नारेबाजी करते पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है।
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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बेरोजगारी के विरोध में थाली बजाकर रैली निकाली गई।
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बेरोजगारी के विरोध में थाली बजाकर रैली निकाली गई। इस अनोखे विरोध में आधा सैकड़ा से अधिक युवाओं, बेरोजगारों ने प्रदर्शन किया। ये युवा भारतीय बेरोजगार मोर्चा के बैनर तले हुए प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट कार्यालय, जिला पंचायत जनसुनवाई में नारेबाजी करते पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है।
कलेक्टर ऑफिस पहुंचे युवाओं ने जो ज्ञापन दिया है, उसमें कई आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि आजादी के 74 साल बीत जाने के बाद भी बेरोजगारी चरम पर है। बेरोजगारी बढ़ने का मुख्य कारण सरकार की गलत नीतियां हैं। आज वर्तमान समय में सुशिक्षित पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा भटक रहे हैं तथा निराश हैं। इसका प्रभाव देश के आर्थिक विकास पर भी पड़ रहा है। गलत नीतियों की वजह से ही आज युवा वर्ग आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहा है।
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छतरपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान थालियों पर युवाओं ने मैं भी बेरोजगार का संदेश लिखा था।
- फोटो : अमर उजाला
विरोध प्रदर्शन में शामिल दीपक रैकवार, मनोज पटेल आदि ने बताया कि हमने ज्ञापन में कई बातें लिखी हैं, जैसे बेरोजगार नकारात्मक, कुण्ठा तथा अपराध की तरफ मजबूरन बढ़ रहा है। युवा नौकरी न मिलने की वजह से आत्मविश्वास में कमी तथा मानसिक दृष्टि से कमज़ोर हो रहा है। सही समय पर सरकारी भर्ती ना होने की वजह से लाखों युवाओं की उम्र की ख़त्म हो रही है। सरकार की ग़लत नीति की वजह से युवा बड़ी संख्या में आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं। इन समस्याओं को ध्यान में रखकर भारतीय बेरोजगार मोर्चा आपसे निवेदन करता है कि इस बेरोजगारी की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने के लिए जरूरी प्रावधान किए जाएं।
युवा भारतीय बेरोजगार मोर्चा के बैनर तले हुए प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे।
- फोटो : अमर उजाला
दीपक रैकवार, मनोज पटेल ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने प्रावधान भी सुझाए हैं, उसमें देश के हर सरकारी, गैरसरकारी संस्थानों में ज्यादा से ज्यादा रोजगार निर्माण किया जाए। देश के सभी बेरोजगारों को जब तक नौकरी नहीं मिलती तब तक बेरोजगारी भत्ता सरकार के द्वारा दिया जाए। बेरोजगारों को स्वरोजगार व उद्योग निर्माण करने के लिए पांच लाख से 25 लाख की आर्थिक मदद सरकार के द्वारा की जाए। सरकारी संस्थानों में SC, ST, OBC और माइनॉरिटी के खाली पड़े पदों को तत्काल प्रभाव से भरा जाए। अब तक देश में संविदा व ठेके पर की गई सभी नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से क़ानून बनाकर स्थायी किया जाए तथा संविदा व ठेके की भर्ती के बजाय नियुक्तियां स्थायी रूप से किया जाए। सरकारी संस्थानों में लेटरल एंट्री को निषेध किया जाए। सभी प्रकार की सरकारी विभागों में नियुक्ति विभिन्न आयोगों/ बोर्डों द्वारा ही किया जाए। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा होने वाले नियुक्तियों को निश्चित समय में अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।