मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को रवींद्र भवन में जनजातीय शिल्पग्राम महोत्सव 2025 का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने जनजातीय कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार कलाकारों और आदिवासी समुदाय के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में प्रदर्शित काष्ठ, धातु और मृत्तिका शिल्प की प्रशंसा करते हुए कलाकारों की कल्पनाशीलता को "मां सरस्वती का वरदान" बताया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकार कला को साकार करने में जितनी मेहनत और समर्पण दिखाते हैं, वह उन्हें विशेष बनाता है। उन्होंने कहा कि हमारे कलाकारों की कलाकृतियां देख ऐसा लगा जैसे वो एक ही दिन में बनी हों। इनका शिल्प संयम, अभ्यास और अद्भुत रचनात्मकता का प्रतीक है। सीएम ने कहा कि हमारे कलाकार कला को मूर्तरूप देते वक्त हिसाब भी बढ़िया रखते हैं। जब उन्होंने बड़े देव की मूर्ति बनाई और सांप देवता ऊपर लपेट दिए, तो मैंने पूछा कि बीच में गड्ढा क्यों कर दिया, तो बोले की सांप देवता की इच्छा होगी तो वो गड्ढे में चले जाएंगे। इससे पता चलता है कि कलाकारों की कल्पनाशीलता अनंत है।