कोर जोन में लगा मेला
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टाइगर रिजर्व में आठ बाघ हैं
मध्य प्रदेश के चंबल में स्थित माधव राष्ट्रीय उद्यान को मार्च 2025 में मध्य प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बनाया गया। यह विंध्य की पहाड़ियों का हिस्सा हैं। ऐतिहासिक रूप से यह ग्वालियर के महाराजा की शिकारगाह हुआ करता था। इसे 1958 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। टाइगर रिजर्व में आठ बाघ हैं।
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क्या होता है कोर एरिया
टाइगर रिजर्व को दो मुख्य भागों में बांटा जाता हैं। एक कोर एरिया और दूसरा बफर जोन। इसमें कोर एरिया टाइगर रिजर्व का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा होता हैं। यहां बाघों का मुख्य निवास, प्रजनन, शिकार और आराम का क्षेत्र होता हैं। इस अपरिवर्तनीय माना जाता हैं, यानी यहां पर मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा जाता हैं ताकि बाघां की आबादी सुरक्षित रहे और बढ़ सकें। वहीं, बफर जोन कोर एरिया के चारों ओर का क्षेत्र होता है। यहां पर कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे पर्यटन, गांवों का विकास की अनुमति सख्त नियमों के साथ होती हैं।
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दिशा निर्देशों के अनुसार मेले की अनुमति दी जाती है
माधव टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने कहा कि यह जिला प्रशासन और वन विभाग संयुक्त रूप से अनुमति देता हैं। वहां ऐतिहासक मंदिर है, जहां लंबे समय से मेला लगता रहा हैं। यह अनुमति पूरी दिशा निर्देशों के अनुसार जारी की जाती हैं। मेला जिला प्रशासन की देखरेख में आयोजित होता हैं।