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MP News: दो किमी पथरीले रास्ते से नदी पार कर गांव पहुंची कलेक्टर नेहा मारव्या,आदिवासियों की सुनी पीड़ा

Fri, 25 Jul 2025 07:11 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

डिंडोरी जिले की कलेक्टर नेहा मारव्या सिंह ने एक मिसाल पेश करते हुए आदिवासी बहुल गांव टांडाटोला तक दो किलोमीटर का पथरीला और नदी पार कर पैदल चली। वहां कलेक्टर ने चौपाल लगाकर न सिर्फ समस्याएं सुनीं, बल्कि मौके पर ही उनके समाधान के निर्देश दिए।  
 
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कलेक्टर नेहा मारव्या पैदल यात्रा करते हुए - फोटो : अमर उजाला
डिंडोरी जिले की कलेक्टर नेहा मारव्या सिंह ने बुधवार को एक ऐसा कार्य किया, जिसने ग्रामीणों का दिल जीत लिया। जिले के सुदूर वनग्राम टांडाटोला में रह रहे आदिवासियों की समस्याएं सुनने के लिए कलेक्टर खुद दो किलोमीटर का पथरीला और नदी का रास्ता पैदल तय कर गांव पहुंचीं। इस दौरान पूरा प्रशासनिक अमला भी उनके साथ पैदल चला। गांव में पहली बार किसी कलेक्टर को देखकर ग्रामीण हैरान और खुश हो गए। कलेक्टर ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। कलेक्टर को ग्रामीणों ने गांव में सड़क और नदी पर पुल का निर्माण कराने की मांग की। साथ ही स्कूल खुलवाने और वन अधिकार के पट्टे  जल्द दिलाने को कहा। कलेक्टर ने समस्याओं पर तत्परता से प्रतिक्रिया दी और सभी काम प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। इस पहले से सरकार के प्रति ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा हैं। 
 
 
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कलेक्टर नेहा मारव्या चौपाल लगाते हुए - फोटो : अमर उजाला
कौन हैं कलेक्टर नेहा मारव्या सिंह?
2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह का प्रशासनिक सफर जितना बेबाक है, उतना ही संघर्षपूर्ण भी रहा है। वे खुद को ईमानदार और स्पष्टवक्ता अफसर मानती हैं, जो कभी किसी दबाव में काम नहीं करतीं। इस वजह से वे कई बार विवादों में भी रही हैं।

 
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डिंडौरी कलेक्टर नेहा मारव्या चर्चा करते हुए - फोटो : अमर उजाला
कलेक्टर से लेकर सीएस के करीबी तक से हुआ टकराव 
शिवपुरी जिला पंचायत की CEO रहते हुए, नियम से अधिक भुगतान वाले वाहन किराए का बिल रोक दिया। इस मामले में उनका कलेक्टर तक से टकराव हुआ। राज्य रोजगार गारंटी परिषद में रहते हुए तत्कालीन मुख्य सचिव के करीबी माने जाने वाले रिटायर्ड अफसर ललित बेलवाल के खिलाफ जांच शुरू की और एफआईआर की सिफारिश कर दी।
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डिंडौरी कलेक्टर नेहा मारव्या ग्रामीणों के साथ - फोटो : अमर उजाला
14 साल की नौकरी के बाद मिला कलेक्टर का पद 
तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी से भी उनका टकराव हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया था  कि उन्हें “गेट आउट” कहकर ऑफिस से निकाला गया। 2017 से 2023 तक, बार-बार विभागीय विवादों के कारण कलेक्टर नहीं बन सकीं। नेहा मारव्हा सिंह ने 2024 के अंत में सोशल मीडिया पर लिखा कि 14 साल की नौकरी के बाद कलेक्टर पद नहीं मिला, जबकि 9 महीनों से बिना जिम्मेदारी के बैठी हैं। इसके बाद उनको मोहन सरकार ने ने डिंडोरी का कलेक्टर बना दिया। 
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