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MP News: अमित शाह बोले- नानाजी देशमुख जैसे व्यक्तित्व समाज पर गहरी छाप छोड़ युग परिवर्तन का कारण बनते हैं

Thu, 27 Feb 2025 05:23 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश

सार

नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि पर चित्रकूट में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नानजी देशमुख को लेकर कहा कि उनके जैसे व्यक्तित्व समाज पर गहरी छाप छोड़ युग परिवर्तन का कारण बनते हैं। 
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अमित शाह ने भारत रत्न स्व. नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।। - फोटो : अमर उजाला
नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि के मौके पर चित्रकूट में कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने चित्रकूट में "नवीनीकृत प्रकल्प राम दर्शन" का रिमोट से लोकार्पण किया। इस अवसर पर अमित शाह ने नानाजी देशमुख के योगदानों की सराहना करते हुए उनकी ग्राम स्वराज की अवधारणा को आज भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि उनका स्वराज का सिद्धांत आज भी गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरणादायक है। शाह ने कहा कि नानाजी देशमुख जैसे महान व्यक्तित्वों ने हमेशा राष्ट्रप्रथम की विचारधारा को अपनाया और समर्पित होकर देश की सेवा की। अमित शाह ने आगे कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपनी जीवनशैली और कार्यों से समाज पर गहरी छाप छोड़ते हैं और युग परिवर्तन का कारण बनते हैं। नानाजी देशमुख उन महान व्यक्तियों में से एक थे। 

 
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गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने चित्रकूट में "नवीनीकृत प्रकल्प राम दर्शन" का रिमोट से लोकार्पण क - फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री ने नए राम दर्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की नई मूर्ति का अनावरण किया। शाह ने कहा कि यहां तीन बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि, अंत्योदय विचारधारा पर मंथन और चित्रकूट के विकास का संकल्प। नानाजी ने पूरे तीर्थ क्षेत्र को जीवंत किया है। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने एक सच्चे राष्ट्र सेवक को भारत रत्न से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित हुए। उन्होंने नानाजी देशमुख के जीवन के संघर्षों और उनके कार्यों को याद करते हुए बीजेपी नेताओं ने उनके योगदान को प्रेरणास्पद बताया।

कौन थे नानाजी देशमुख
बता दें नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली में हुआ था। उनका परिवार मराठी भाषी ब्राह्मण था। अपनी शिक्षा के लिए पैसे जुटाने के लिए उन्होंने सब्जी बेचने तक का काम किया। नानाजी ने सीकर में हाई स्कूल की पढ़ाई की, जहां उन्हें रावराजा से स्कॉलरशिप प्राप्त हुई। इसके बाद नानाजी ने बिड़ला कॉलेज में अपनी उच्च शिक्षा जारी रखी और साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए। 1952 में जनसंघ की स्थापना के बाद नानाजी को उत्तर प्रदेश में जनसंघ का कार्य सौंपा गया। 1967 में वे जनसंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बने और दिल्ली आ गए। नानाजी ने दिल्ली में 'दीनदयाल शोध संस्थान' की स्थापना की, जो आज भी उनके विचारों को आगे बढ़ा रहा है। इसी प्रकार मराठवाड़ा, बिहार आदि में भी कई गांवों का पुननिर्माण किया. 1999 में वे राज्यसभा में मनोनीत किए गए. नानाजी ने 27 फरवरी, 2010 को अपनी कर्मभूमि चित्रकूट में अंतिम सांस ली थी. 2019 नानाजी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। नानाजी देशमुख का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था, और उन्होंने हमेशा समाज के उत्थान के लिए कार्य किया।  
 
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