बच्चों को फल वितरण करते हुए।
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जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए पोषण मटका कार्यक्रम
जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए पोषण मटका कार्यक्रम भी प्रदेश में संचालित किया जा रहा है, जिसमें वार्ड, गांव की महिलाएं अपने घर से एक मुट्ठी अनाज लेकर आती हैं, जो पोषण मटके में एकत्र होता है। अनाज का उपयोग शनिवार को बाल भोज के लिए किया जाता है। पोषण के प्रति जन-जागरूकता लाने के लिए पोषण गीत, भजन तथा पोषण गुरुओं का सहारा लिया जाता है। सभी आंगनवाड़ी केंद्र में भजनों के माध्यम से महिलाओं को एकत्रित किया गया और गीतों से हर घर तक पोषण की समझ को पहुंचाया जाता है। स्कूलों में पोषण पर चर्चा के साथ ही आंगनवाड़ी केन्द्र में आकर महिलाओं और बच्चों को भी विस्तार से पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में 'पोषण कार्नर'
प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में अब बच्चों को लड्डू, मठरी, नमकीन, मुरमुरे, बिस्किट, भुना चना-गुड़ भी मिलता है और इन्हें खाने के लिए किसी से पूछने और मांगने की जरूरत भी नहीं होगी। राज्य सरकार सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में 'पोषण कार्नर' शुरू कर रही है, जो बच्चों की पहुंच में होंगे। यह नवाचार कुपोषण की स्थिति में सुधार लाने के लिए किया जा रहा है। अब इस सामग्री को तैयार करने में गेहूं, चना, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का और कोदोकुटकी का उपयोग किया जाएगा। पोषण कार्नर में रखी जाने वाली सामग्री का इंतजाम जन सहयोग से किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर अभियान चलाकर इस अभियान को नई गति मिल रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी सामग्री लोहे की कड़ाही में बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि बच्चों में हीमोग्लोबिन की स्थिति सुधर सके।