मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होना है। विधानसभा चुनाव में पीढ़ी का अतंर (जनरेशन गैप ) का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा का कारण 15 लाख से ज्यादा युवाओं का इस चुनाव में पहली बार मतदान करना और 56 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं का 40 साल से काम उम्र का होना है। यह मुद्दा खासकर तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है जब सरकार के ज्यादातर मंत्रियों की उम्र 60 से ऊपर और हर तीसरे मतदाता की उम्र 29 से कम है।
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कुसुम मेहदेले
इनमें मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र बुधनी भी शामिल है जहां 33 फीसदी मतदाता बीस से कम उम्र के हैं जबकि सूबे के मुखिया खुद 60 साल के हो चुके हैं। प्रदेश सरकार में कुसुम सिंह (75) महदेले सबसे उम्रदराज मंत्री हैं। इनके विधानसभा क्षेत्र पन्ना में भी हर तीसरा मतदाता 29 से काम उम्र का है।
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मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट भाषण देते वित्त मंत्री जयंत मलैया
71 वर्षीय वित्त मंत्री जयंत मलैया जनरेशन गैप के मुद्दे पर कहते हैं कि पार्टी का युवा मोर्चा इस अंतर को दूर करेगा। उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद उनका बेटा युवा मतदाताओं से संवाद स्थापित करने में उनकी मदद कर रहा है। 66 वर्षीय किसान कल्याण मंत्री गोपाल भार्गव इस मुद्दे पर कहते हैं कि जब भी मैं युवाओं से रूबरू होता हूं तो अपनी उम्र तीन साल काम कर लेता हूं। मैं उनसे उन्हीं की भाषा में बात करता हूं और सीनियर और जूनियर का कोई अंतर् नहीं रखता। इसके अलावा मैं खुद को सूचनाओं से अपडेट रखता हूं।
सरकार के कई मंत्री सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और कुछ ने इसका जिम्मा निजी एजेंसी के जिम्मे दे रखा है। मौजूदा सरकार के 15 मंत्रियों की उम्र 60 से ज्यादा, तीन की उम्र 70 से ज्यादा जबकि सात की उम्र 65 से ज्यादा है। दिलचस्प बात ये है कि इनमें से ज्यादातर के निर्वाचन क्षेत्र में 30 फीसदी मतदाताओं की उम्र 30 साल से काम है ।
मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रियों की उम्र
कुसुम महदेले: 75 साल
रुस्तम सिंह: 73 साल
जयंत मलैया: 71 साल
गौरी शंकर शेजवार: 68 साल
माया सिंह: 68 साल
गोपाल भार्गव: 66 साल
उमाशंकर गुप्ता: 66 साल
गौरीशंकर बिसेन: 66 साल
शरद जैन (राज्य मंत्री): 66 साल
बालकृष्ण पाटीदार( राज्य मंत्री): 65 साल
हर्ष सिंह (राज्य मंत्री): 64 साल
जयभान सिंह पवैया: 63 साल
नारायण सिंह कुशवाहा: 63 साल