विवेक कुमार सिंह
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विश्वास का संकट दूर करने की जद्दोजहद
- विवेक कुमार सिंह
बीकॉम करने के बाद एसबीआई में पीओ पद पर चयन हो गया। नौकरी समझ नहीं आई। पापा के साथ चाय पर चर्चा के दौरान अचानक तय कर लिया और एलएलबी की तैयारी शुरू कर दी। वर्तमान में हाईकोर्ट में कॉरपोरेट व लेबर लॉ के मामले देख रहा हूं। हालांकि मुझे अभी सिर्फ 3.5 साल का ही अनुभव है, लेकिन इस थोड़े से वक्त में समझ आया कि वकीलों के सामने विश्वास का बड़ा संकट है और यही इस पेशे की चुनौती भी है। दरअसल लीगल मार्केट खड़ा हो गया है और इसके कारण यह व्यवसाय भी पूरी तरह से बाजार आधारित होता जा रहा है, लगभग हो ही गया है। जबकि एक बड़ा वर्ग ऐसा है, खासकर भारत में जिसे निशुल्क या कहें कि सस्ती कानूनी सहायता भी चाहिए। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए मैंने डिफेंस में इंटरेस्ट लेना शुरू किया है। मैंने तय किया है कि सैन्य पृष्ठभूमि वालों के केस मैं निशुल्क लड़ूंगा।
मेरा सपना : मेरे आदर्श मेरे पिता मदन नारायण सिंह हैं। मेरा सपना है कि मैं एक ऐसे वकील के रूप में पहचान बना सकूं, जिसके पास वह हर जरूरतमंद आ सके, जिसे कहीं और मदद नहीं मिल पाती है।