राहुल
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इन्होंने तो जूतों को ही डिजाइनर बना दिया
राहुल शास्त्री
मैं लखनवी हूं और यहीं रहकर काम करता हूं। यह बात मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाती है। एनआईएफटी करने के बाद दिल्ली चला गया नौकरी करने। सब्यसाची मुखर्जी एसेसरीज ब्रांड लॉन्च कर रहे थे, उसे शुरू करने का मौका मिला। 3.5 साल तक उनके साथ काम करने के बाद मैं लौट आया, क्योंकि मुझे खुद कुछ करना था। पापा अश्विनी कुमार शास्त्री और मां शशिबाला को जब बताया कि मैं जूते डिजाइन करूंगा तो सबको आश्चर्य हुआ। लोगों ने तो यहां तक कहा कि मोची बनोगे क्या? खैर मैंने उस बात को सच करने की ठानी थी कि ‘जूते इतने चमकने चाहिए कि उसमें चेहरा नजर आए।’ मैंने अपना ब्रांड लॉन्च किया और मैं गर्व से कह सकता हूं कि मेरे जूते की चमक में चेहरा दिखता है।
मेरा फोकस : इंडियन शू डिजाइनर के चाहने वाले विदेशों में भी हैं। हां, फिलहाल मेरी ब्रांड की पहुंच सेलीब्रेटी तक है। मैं जूतों में भी एक अनूठापन विकसित कर पाया हूं। सैफ अली खान भी मेरे जूतों के मुरीद हैं और एडवर्ड लम्पूरिया भी हमारे क्लाइंट हैं।