लखनऊ में शनिवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने व्रत का पारण किया। परिजनों के साथ दूरदराज से काफी संख्या में पहुंची महिलाओं ने घाट पर पूजा की।
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- फोटो : अमर उजाला
इसके पहले सोलह शृंगार में सजी-धजी और मौसमी सब्जियों-फलों से भरी सूप सिर पर उठाए घाट की ओर जातीं व्रती महिलाएं। दीपों और गन्ने की ढेरियां से सुसज्जित सुशुभिताएं... और छठ मैया के गूंजते गीत। ये नजारा था शुक्रवार की शाम शहर के तमाम घाटों का, जहां व्रती महिलाओं ने छठ माई की कथा सुनकर फलों से भरी सूप को सिर पर उठाकर घुटनों तक पानी में जाकर डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। (तस्वीर में, शनिवार सुबह पूजन करती महिलाएं।)
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परिवार के साथ घाट पर पहुंची महिलाओं ने कोविड प्रोटोकॉल के तहत मुंह पर मास्क लगाकर विधि विधान से छठ माई के गीत गाते हुए पूजा-अर्चना की। (तस्वीर में, शनिवार सुबह पूजन करती महिलाएं।)
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लक्ष्मण मेला घाट समेत गोमती नदी के तमाम घाटों पर दोपहर से पहले ही व्रती महिलाओं के जुटने का सिलसिला शुरू हुआ। (तस्वीर में, शनिवार सुबह पूजन करती महिलाएं।)
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शाम होते ही लक्ष्मण मेला घाट, झूलेलाल घाट, कुड़ियाघाट, पक्का पुल घाट पर पर्व की रौनक परवान चढ़ी। (तस्वीर में, शनिवार सुबह पूजन करती महिलाएं।)
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परिजनों के साथ दूरदराज से पहुंची महिलाओं ने छठ मैया की पूजा कर अस्ताचल की ओर बढ़ते सूर्य को अर्घ्य दिया। (तस्वीर में, शनिवार सुबह पूजन करती महिलाएं।)
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घाटों पर लगा आस्था का मेला
शुक्रवार को तीन बजते बजते सूप, पूजन सामग्री आदि के साथ महिलाएं परिवार के पुरुषों के साथ घाट पर जुटना शुरू हुई। व्रती महिलाओं ने घाट के किनारे अपनी सुशुभिता के आसपास पूजन करना शुरू किया।
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छठ के परंपरागत गीत कांचहिं बांस की बहंगिया बहंगी लचकत जाए.., पहिले पहिल हम कइनी छठी मइया बरत तोहार... जैसे तमाम गीतों के बीच कई पुुरुष सिर पर टोकरी में पूजन सामग्री और कलश पर जलते दीपक के साथ पहुंचने शुरू हुए।
कई लेट के मनौती की परिक्रमा करते हुए पहुंचे। छठी मइया अंगने में कोसिया भराइब हो... गीतों के बीच महिलाओं ने पूजन के बाद सूर्यास्त होने से पूर्व पानी के भीतर उतर कर अर्घ्य दिए।