महिलाओं के हाथ में दिनभर मोबाइल फोन देख यदि आपको लगता कि वे चैटिंंग में लगी रहती हैं, तो आप गलत सोच रहे हैं। दरअसल, लखनऊ में बड़ी संख्या में महिलाएं व्हाट्सएप पर कारोबार कर रही हैं। आपको अच्छी खासी दुकान इन महिलाओं के मोबाइल फोन में मिल जाएगी। कोराना गाइडलाइन को लेकर सख्त महिलाओं ने घर पर खुद को व्यस्त रखने का यह तरीका ढूंढ निकाला है। एक तरफ वे अपने हुनर को निखार रही हैं तो दूसरी तरफ वे व्हाट्सएप ग्रुप पर कारोबार को बढ़ा रही हैं। लॉकडाउन के पहले तक महज कुछ ही ग्रुप कारोबार से जुड़े थे। लॉकडाउन के दौरान करीब 40-50 ग्रुप सामने आए हैं। आइए जानते हैं ऐसी कुछ महिलाओं से, जो चैटिंग को बाय-बाय कर अपने कारोबार को दे रहीं नई ऊंचाइयां...।
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शिल्पी शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
स्नातक पूरा करते ही शुरू किया कारोबार
लॉकडाउन लग चुका था। स्नातक पूरा हो गया था तो अब करते क्या? इसलिए खुद की बनाई चीजों को व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर साझा करने लगी। लोगों को पसंद आया और कारोबार की गाड़ी आगे बढ़ गई। ये कहना है एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की स्टूडेंट रही शिल्पी शुक्ला का। कहती हैं कि मैं हैंडलूम को बढ़ावा देना चाहती हूं और फिलहाल हाथ की एंब्रायडरी वाले घर की साज-सज्जा के सामान बना रही हूं। मेरा सपना अपना ब्रांड तैयार करना, अपनी कंपनी खोलने का है।
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सुरभि वैश्य अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
12 साल का अनुभव,आज देश भर में क्लाइंट
आशियाना निवासी सुरभि वैश्य अग्रवाल एक-दो नहीं बल्कि 12 साल से ऑनलाइन कारोबार कर रही हैं। कहती हैं कि मैंने 12 साल पहले ज्वैलरी का अपना कारोबार शुरू किया, क्वालिटी लोगों को काफी पसंद आती गई, मैं प्रोडक्ट बढ़ाती गई। आज मेरे देश भर में क्लाइंट हैं और मेरा काम लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
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वंशिका जासवानी
- फोटो : अमर उजाला
बंद शो रूम ने दिखाई राह
वंशिका जसवानी व्हाट्सएप पर वेस्टर्न वियर का कारोबार करती हैं। कहती हैं कि लॉकडाउन में पति का शो रूम बंद था। हमें लगा कि भंडार अच्छा खासा है, घर बैठकर काम किया जाए। बस एक दिन अनुमति से दुकान खोली, सारा सामान निकाला और घर पर रख लिया। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कारोबार शुरू हो गया। लोगों का रुझान अच्छा दिखा, इसलिए इसे शोरूम खुलने के बाद भी जारी रखने का फैसला लिया है।
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हरशीन आनंद
- फोटो : अमर उजाला
बिना निवेश काम, जोखिम भी कम
जानकीपुरम में रहने वाली हरशीन आनंद कहती हैं कि मैं काफी पहले व्हाट्सएप पर कारोबार करती थी, लेकिन कोरोना से पहले ही बंद कर दिया था। लॉकडाउन में मुझे लगा कि फिर से इसे शुरू करना चाहिए। मैंने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है, एग्जीबिशन लगाती थी। इसी से मुझे इस काम को शुरू करने की प्रेरणा मिली। मैं घर की साज-सज्जा के सामान बेचती हूं। दरअसल, यह बिना निवेश का काम है और जोखिम भी कम है।
बोरियत में मिला रास्ता
मोतीनगर निवासी जसप्रीत कौर बताती हैं कि घर में रहकर बोर हो चुकी थी। न कहीं जाना, न कहीं आना। यह सिलसिला कब तक ऐसे ही चलेगा, कुछ मालूम नहीं था। ऐसे में लगा कि कुछ करना चाहिए। दोस्तों से चर्चा की तो व्हाट्सएप पर कारोबार का आइडिया मिला। कभी सोचा नहीं था कि मैं कोई कारोबार भी करूंगी। आज हमारे ग्रुप से 80 के करीब महिलाएं जुड़ी हैं। जिस तरह का सबका रिस्पांस है, उससे देख कर लगता है कि हालात पूरी तरह से सामान्य हो जाने पर काम और बढ़ेगा। जसप्रीत के मुताबिक, वे महिलाओं के लिए एसेसरीज, कपड़े व अन्य उत्पाद का काम कर रही हैं।