हरी सब्जी कहने को तो फायदेमंद हैं लेकिन यदि वे नाले के पानी से सींची जाएं तो वह निश्चित ही नुकसान दायक हो सकती हैं।
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नाले के पानी से सींची जा रही हैं सब्जियां, तस्वीरें
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लखनऊ में कुछ ऐसा ही हो रहा है। यहां पर गोमती नदी के किनारे जो नाले गिर रहे हैं उन्हीं के पानी से सब्जियां उगाई जा रही हैं। यही सब्जियां लखनऊ और उसके आसपास के बाजारों में पहुंच रही हैं।
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नालों मौजूद पानी और एसटीपी से निकल रहे अनट्रीटेड पानी से खेतों की सिंचाई से जहां सब्जियों, अनाज व अन्य उत्पादों में हानिकारक तत्व पहुंच रहे हैं, वे हमारे भोजन की प्लेट तक भी आ रहे हैं।
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लखनऊ शहर में विभिन्न किस्म के प्रदूषण पैदा करने वाले तत्व नालों में मिलते हैं, जिनसे कैंसर तक हो सकता है। खेती के दौरान उपयोग हुए इस पानी से इन तत्वों के अंश हमारी प्लेट तक पहुंच रहे हैं।
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राजधानी के कई इलाकों में खेतों की सिंचाई नालों के पानी से हो रही है। रहीमनगर में कुकरैल बंधे के आसपास खेतों में भिंडी, लाल-लाल टमाटरों की फसल नाले के पानी से ही लहलहा रही है।
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इसके बाद यहां मक्का और तुरई उगाई जाएगी। यहां खेती कर रहे किसान रघुवीर सोनकर ने बताया कि वे कई साल से इसी तरह खेती कर रहे हैं। शहर के बाकी हिस्सों में भी गंदे नाले के पानी से ही उगाई गई सब्जियों को हम बड़े चाव से खा रहे हैं।
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देखने में तो यह सब्जियां आम सब्जी जैसी ही होती हैं लेकिन चूंकि जिस पानी प्रयोग सिंचाई के लिए होता है वह दूषित होने की वजह से इसका सीधा असर सब्जियों पर पड़ता है।
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सिंचाई के लिए नाले में पंप तक लगा दिया गया है। नाले के पानी में इस कदर बदबू है कि बहां खड़े भी होना मुश्किल है लेकिन सब्जियों की सिंचाई में वही पानी इस्तेमाल हो रहा है।
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त्रिवेणी नगर से आकर गोमती में गिर रहे नाले से भी कई एकड़ में फैले खेतों को सींचा जा रहा है। यहां खेतों की सिंचाई के लिए नदी मौजूद है, लेकिन वहां तक पाइप ले जाने पर खर्च बढ़ जाता है, इसलिए इन शहरी किसानों ने करीब से गुजर रहे नाले में ही पाइप गिराकर मोटर से पानी खींचना शुरू कर दिया है।