मनोहर परिकर यूपी से राज्यसभा पहुंचने को अपना सौभाग्य बता रहे हैं, लेकिन शायद ही उन्होंने कभी सोचा होगा कि केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री बनने का रास्ता राजनीति की ऐतिहासिक जमीन लखनऊ से होकर गुजरेगा। आइए, तस्वीरों में देखते हैं मनोहर परिकर का सफर और जानते हैं कुछ ऐसी बातें जो शायद आपको न पता हों...
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मनोहर 'परिक्रमा': गोवा टू दिल्ली वाया लखनऊ
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13 दिसंबर, 1955 को उत्तरी गोवा के मापुसा तालुका में जन्मे मनोहर शुरुआत से ही प्रतिभावान रहे। जब मनोहर आईआईटी की तैयारी कर रहे थे, तभी तत्कालीन प्रांत प्रचारक डी नादकर्णी का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा और वे एक शाखा के मुख्य शिक्षक बनाए गए।
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मनोहर परिकर ने आपातकाल के दौरान आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लिया और मेटेलर्जी साइंस से बीटेक करते हुए भी वो संघ का काम करते रहे। उन्हें आरएसएस की पवई हॉस्टल यूनिट की जिम्मेदारी मिली, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। महज 26 साल की ही उम्र में मनोहर मपूसा यूनिट में संघचालक बन गए। संघ की एक मैगजीन साप्ताहिक विवेक की मानें तो यह अपने आप में संघ के लिए एक इतिहास है।
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1994-1999 में मनोहर परिकर पहली बार विधानसभा पहुंचे, वह भी संघ के निर्देश पर। उन्होंने न सिर्फ महाराष्ट्र में पार्टी को बेहतर स्थिति में लाकर खड़ा किया, बल्कि सूबे में दूसरे स्थान पर भी काबिज कर दिया। नवंबर, 1999 में उन्हें लीडर ऑफ ऑपोजीशन का पद दिया गया।
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2000 में गोवा के मुख्यमंत्री बनने से ठीक पहले उनकी पत्नी का कैंसर से निधन हो गया। 2005 तक वे सूबे के सीएम रहे। हालांकि, यह वक्त उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2007 से 2012 तक मनोहर लीडर ऑफ ऑपोजीशन रहे और उन्होंने आने वाले चुनाव में बीजेपी के लिए जबरदस्त माहौल तैयार किया।
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2013 में गोवा के मुख्यमंत्री बने और 8 नवंबर, 2014 तक कुर्सी पर काबिज रहे। उन्होंने अपनी क्षमताओं का लोहा मनवाया और शीर्ष नेतृत्व तक भी अपनी पकड़ भी मजबूत कर ली। 2013 में उनके बेटे की शादी में मोदी से लेकर सभी बड़े नेताओं ने शिरकत की। नितिन गडकरी को जब राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा रहा था, तो एक नाम मनोहर परिकर का भी था।
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मनोहर परिकर के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने हर चुनौती को स्वीकार किया और डेमोग्राफी में यूपी, एमपी या राजस्थान जैसे प्रदेशों से एकदम जुदा गोवा को एक मॉडल स्टेट बनाने की कोशिश की। उनका जमीनी व्यक्तित्व और गंभीर स्वभाग भी उन्हें लोगों की पसंद बनाता रहा।
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अगर आप नहीं जानते तो बता दें कि मनोहर परिकर ही भाजपा के पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी का समर्थन किया था। परिकर ने ही गोवा में राष्ट्रीय कार्यसमिति कराई, जिसमें लोकसभा चुनाव की कमान मोदी के हाथ में सौंपी गई थी। हालांकि, इस मौके पर आडवाणी की गैर-मौजूदगी ने काफी हंगामा खड़ा कर दिया था।
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इसी साल फरवरी में मनोहर परिकर ने लखनऊ में हुए भाजपा के बुद्घिजीवी सम्मेलन में हिस्सा लिया और अरविंद केजरीवाल और उनकी सादगी पर निशाना साधा। इसके बाद भी चुनाव प्रचार के दौरान मनोहर परिकर लखनऊ आए।
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मनोहर परिकर को यूपी से भाजपा ने राज्यसभा भेजकर कई बड़े नेताओं की गणेश परिक्रमा को अनदेखा कर दिया। क्योंकि, यह फैसला सीधे मोदी का था इसलिए कोई नेता विद्रोह नहीं कर पाया। सभी मन मसोस कर बैठ गए। सोमवार दोपहर विधानसभा के सेंट्रल हॉल में मनोहर परिकर ने राज्सभा के लिए नामांकर दाखिल कर दिया। हालांकि, रविवार को ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री की शपथ ले ली और रात में उन्हें रक्षा मंत्रालय भी सौंप दिया गया।
मनोहर परिकर मोदी के बेहद करीबी माने जाते हैं। उनकी अरुण जेटली से भी काफी गहरी मित्रता है। यही वजह है कि केंद्र में उन्हें यह अप्रत्याशित जिम्मेदारी दी गई। हालांकि, मनोहर परिकर ने लखनऊ आकर कहा कि वो गोवा ही रहना चाहते थे, लेकिन मोदीजी को मना नहीं कर पाए।