क्या होता है जब दो आत्माएं अपना शरीर बदल लेती हैं। ये पढ़कर आप चौंक गए होंगे। लखनऊ में सोमवार शाम ऐसा ही कुछ हुआ।
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क्या हुआ जब आत्माओं ने बदल लिए शरीर, तस्वीरें...
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शांडिल्य की खुराफात के चलते ही गुरू परिब्राजक अपनी आत्मा मृतक अज्जुका के शरीर में प्रवेश करा देते हैं। अज्जुका जीवित हो जाती है, लेकिन बदले हावभाव के साथ।
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वह गुरू की तरह बर्ताव करने लगती है। इसी दौरान यमदूत भी आ जाता है, वह गुरू के शरीर में अज्जुका की आत्मा डाल देता है और गुरू अज्जुका की तरह उठने-बैठने, गाने और बोलने लगते हैं।
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इसके बाद जो हास्यास्पद स्थितियां पैदा होती हैं, वह समापन तक नजर आती हैं। यह लब्बोलुआब है दृश्यभारती की ओर से राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में चल रहे नाट्य समारोह के समापन पर मंचित नाटक ‘भगवद्ज्जुकम’ का।
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इसका निर्देशन आनंद शर्मा का रहा। चूंकि, नाटक का मंचन पहले कई बार हो चुका है, इसलिए दर्शकों पर बहुत प्रभाव छोड़ता हुआ नजर नहीं आता।
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संवादों में कसावट रही, पर आत्माओं के हेरफेर से जो हास्यप्रद माहौल मंच पर पैदा होना चाहिए था, वह कहीं नहीं दिखा।
अभिनय के लिहाज से शांडिल्य बने आशीष दुबे, परिब्राजक अर्पित मिश्र, अज्जुका बनी पारुल राय और गुरुदत्त पांडेय, उमा सिंह, रत्ना अग्रवाल, संजय त्रिपाठी, विपिन कुमार, गौतम शुक्ल का काम ठीक-ठाक रहा।