देश की पहली स्वेदशी ट्रेन 18 को ट्रायल के लिए सोमवार को चेन्नई से यूपी के लिए रवाना किया गया। यह ट्रेन चार दिन में यूपी पहुंच जाएगी और दो नवंबर से मुरादाबाद-सहारनपुर रेलखंड पर इसका ट्रायल शुरू होगा। इसके लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के टेस्टिंग निदेशालय के इंजीनियरों की टीम तैयार कर दी गई है।
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जांची जाएगी ट्रेन की स्पीड
- फोटो : amar ujala
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित ट्रेन 18 देश की पहली ऐसी ट्रेन है, जो बिना इंजन के चलती है। इसे तैयार करने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा और करीब 100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। आरडीएसओ के कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) एनके सिन्हा ने बताया कि ट्रेन 18 का ट्रायल दो रेलखंडों पर होना है। इसमें पहला मुरादाबाद-सहारनपुर रेलखंड है, यहां अधिकतम 115 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के संचालन को जांचा जाएगा। बाद में राजस्थान स्थित कोटा-सवाईमाधोपुर रेलखंड पर 180 किमी प्रति घंटे पर ट्रेन की स्पीड जांची जाएगी।
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80 दिन चलेगा ट्रायल
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शताब्दी एक्सप्रेस से बेहतर ट्रेन 18
ट्रेन 18 शताब्दी एक्सप्रेस से कई मायनों में बेहतर है। ट्रेन 18 में शताब्दी की तुलना में यात्रा काफी सुखद और आरामदायक रहेगी। ट्रेन 18 की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटा है, जबकि शताब्दी की अधिकतम स्पीड 130 किमी प्रति घंटा होती है। यानी शताब्दी की तुलना में 15 प्रतिशत तक समय की बचत होती है।
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इसलिए खास है ट्रेन 18
ट्रेन 18 सेल्फ प्रोपेल्ड है। इसलिए इंजन की जरूरत नहीं पड़ती। बोगियों में लगी सीटें 360 डिग्री तक घूम सकती हैं।
पूरी ट्रेन एसी चेयरकार है। ट्रेन में स्वत: खुलने व बंद होने वाले गेट, जीपीएस आधारित पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, वाई-फाई आदि सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी।