फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लखनऊ जू में गूंजेगी आदमखोरों की दहाड़, कर चुके हैं छह का शिकार

Thu, 28 Dec 2017 01:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 5
चिड़ियाघर में आदमखोर - फोटो : amarujala
नए साल में लखनऊ का प्राणि उद्यान पहली बार एक साथ तीन आदमखोर बाघों की दहाड़ से गूंजेगा। जू में रह रहे दो खूंखार बाघों ‘मुस्तफा’ और ‘छेदीलाल’ को अब दर्शकों के सामने लाने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल आदमखोर ‘किशन’ अपने बाड़े में टहलता दिख जाता है। ‘छेदीलाल’ और ‘मुस्तफा’ अब तक जू की कोरेनटाइन बैरकों में ही हैं। यूपी के किसी भी प्राणि उद्यान के लिए यह पहला मौका होगा, जहां तीन आदमखोर नर बाघ दर्शकों के सामने होंगे।इन्हें शिफ्ट करने को लेकर बुधवार को बैठक के बाद सहमति बनी। तीनों आदमखोरों का जू के उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष ने ही रेस्क्यू किया था। डॉ. शुक्ला ने बताया कि एक साल से भी अधिक समय से आदमखोर बाघ ‘मुस्तफा’ और ‘छेदीलाल’ जू की कोरेनटाइन बैरक में रह रहे हैं। अब शांत हुए हैं। ऐसे में हम तैयारी कर रहे हैं कि दोनों को ‘किशन’ बाघ की तरह बाड़ों में उतारा जाए। एक-दो हफ्तों में ऐसा किया जाएगा।
विज्ञापन

2 of 5
आदमखोर छेदीलाल - फोटो : amarujala
220 किलो का है ‘छेदीलाल’ 
आदमखोर छेदीलाल 11 साल का है। इसे अगस्त 2016 में मैलानी खीरी के छेदीपुर गांव से रेस्क्यू होकर प्राणि उद्यान लाया गया था। 220 किलो से अधिक वजनी यह बाघ तब तक 6 लोगों की जान ले चुका है। आंख में चोट और एक कैनाइन दांत टूटने से यह नरभक्षी बना था। इसे ‘किशन’ का पड़ोसी बनाया जा सकता है।
 
विज्ञापन

3 of 5
आदमखोर मुस्तफा - फोटो : amarujala
छह का शिकार कर चुका ‘मुस्तफा’ 
फरवरी-2017 को पीलीभीत के मुस्तफाबाद से रेस्क्यू कर मुस्तफा को लाया गया। वजन 150 किलो से अधिक है और छह लोगों का शिकार कर चुका है। इसकी उम्र साढ़े तीन साल है। इसके लिए भी ‘आर्यन’ के बाड़े में बुनियादी सुधार किए जाएंगे।
 

4 of 5
आदमखोर किशन - फोटो : amarujala
10 साल से अधिक उम्र का है ‘किशन’ 
आदमखोर किशन दस साल का है। वजन पौने दो क्विंटल। 2008-09 में किशनपुर रेंज से रेस्क्यू कर लाया गया था। पांच लोगों की जान ले चुका है। लंबे समय तक कैंसर का इलाज चला। 2015 में उसे बाड़े में खोला जाना शुरू हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आदमखोर छेदीलाल - फोटो : amarujala
जब आदमखोर ‘किशन’ को छोड़ा गया तो वह नीम के 12 फीट ऊंचे पेड़ पर दो छलांगों में चढ़ बैठा था। ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए रॉयल बंगाल टाइगर हाउस के इमली के विशालकाय पेड़ की बाड़े के बाहर तक पहुंचने वाली टहनियों की बुधवार को छंटाई शुरू करा दी गई। वहीं छेदीलाल व मुस्तफा के लिए भी बाड़े तैयार हो रहे हैं।  दोनों में से एक को सफेद टाइगर के बाड़ों में उतारा जाना तय हुआ है, जहां ‘आर्यन’ रहता था। दूसरे आदमखोर को रॉयल बंगाल टाइगर बाड़े में ‘किशन’ का पड़ोसी बनाया जाएगा। वहां रह रहे अधेड़ हो चुके ‘शिशिर’ के लिए विकल्प तलाशा जा रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें