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करवा चौथ: सीमा पर तैनात जवानों की इन पत्नियों को सलाम, बोलीं- देश पहले बाकी सब उसके बाद

Thu, 17 Oct 2019 02:10 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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करवा चौथ - फोटो : अमर उजाला
सीमा पर तैनात जवानों की पत्नियों के लिए करवाचौथ महज पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निर्जल रहकर रखा जाने वाला उपवास नहीं, बल्कि देश के प्रति निभाया जाने वाला ‘महाधर्म’ हैै। इसके लिए ईश्वर ने उन्हें विशेष तौर पर चुना है। वे जानती हैं कि इस खास मौके पर वे अपने जीवनसाथी के संग नहीं है, बावजूद इसके उन्हें जिंदगी से कोई गिला नहीं। इस करवाचौथ पर सलाम उन पत्नियों को, जिन्होंने देश की खुशी पर न्योछावर कर रखी हैं अपनी खुशियां। आइए, आप भी मिलिए इनसे।
 
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सुप्रीत बाली - फोटो : अमर उजाला
देश पहले, बाकी सब उसके बाद
- सुप्रीत बाली

मैं साइकोलॉजिस्ट व फिटनेस ट्रेनर हूं। पति कर्नल आर सिंह कई हजार किमी दूर तैनात हैं। 16 साल पहले जब हमारी शादी हुई तो उस वक्त सोशल मीडिया भी नहीं था। उनकी हमेशा ऐसी जगह तैनाती रही, जहां फोन पर बात करना भी मुश्किल होता। मैं फोटो के साथ व्रत खोलती। देश की रक्षा हमारे लिए महाधर्म है। सारे त्योहार इसके बाद हैं। उदासी मन में होती है पर चेहरे पर नहीं, क्योंकि पति जिस ड्यूटी पर हैं, हमें उनका हौसला बढ़ाना है। आर्मी अफसरों की पत्नियां मानसिक तौर पर बहुत मजबूत होती हैं या यूं कहें कि वक्त उन्हें मजबूत बना देता है। हमें हर सांस की और हर पल की कीमत का अंदाजा होता है और यही वजह है कि हम जिंदगी के हर पल को खुशी के साथ जीने में यकीन करते हैं।
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तृप्ति भंडारी - फोटो : अमर उजाला
उनकी जिम्मेदारियों से वाकिफ हूं
- तृप्ति भंडारी

पति मेजर वी. भंडारी की सुदूर अंचल में तैनाती है। हमारी शादी 2010 में हुई थी। मैं उन खुशनसीब में हूं, जिन्हें पहला करवाचौथ साथ मनाने का मौका मिला। अब तो मोबाइल के नेटवर्क के भरोसे रहना पड़ता है। हां, मैं तैयार होने, पूजा करने में कसर नहीं छोड़ती। हमने शादी के साथ ही तय कर लिया था कि ड्यूटी पहले है, इसलिए हम जब साथ होंगे, तब सारे त्योहार मना लेंगे। हमारे घर में होली, दीपावली, करवाचौथ समेत सारे पर्वों की रौनक उनके छुट्टी पर आने के दौरान होती है। हम इन नौ सालों में ज्यादातर समय दूर ही रहे हैं। इस सच से वाकिफ  हैं कि त्योहारों के दौरान जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। उम्मीद है कि वीडियो कॉल करके व्रत खोल सकूंगी।

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उर्वी त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
स्पेशल वाली फीलिंग देती है तसल्ली
- उर्वी त्रिपाठी

मैं टीचर हूं और पति एस पांडेय एसएसबी डिप्टी कमांडेंट। 2014 में हमारी शादी हुई। पहले करवाचौथ पर वे कश्मीर शिफ्ट हो रहे थे। कारवां बहराइच से होकर गुजरा था। उस दिन करवाचौथ था। सिर्फ  दो मिनट के लिए वे घर की दहलीज तक आए और फिर चले गए। वो दो मिनट ही बहुत था मेरे लिए। उसके बाद से हम सारे त्योहार वीडियो कॉलिंग से मनाते हैं। ये नहीं कहूंगी की उस दिन मन उदास नहीं होता, लेकिन तैयार होने के साथ व्रत भी रखती हूं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
सच कहूं तो गर्व होता है कि ईश्वर ने हमें ऐसे काम के लिए चुना है, जो खास होने का अहसास कराता है। चार साल का बेटा है। उसके सवाल कई बार जरूर परेशान करते हैं कि पापा त्योहार साथ क्यों नहीं मनाते। पर अब उसने भी कहना शुरू कर दिया कि मुझे पापा की तरह डिप्टी कमांडेंट बनना है।
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