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UP Board Result : इन मेधावियों की सफलता के पीछे संघर्ष की है बड़ी दास्तां, पढ़कर आप भी करेंगे सलाम

Mon, 30 Apr 2018 10:13 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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up board - फोटो : amar ujala
सफर में मुश्किलें थी...। अभावों की पगडंडी थी...। दुश्वारियों की फिसलन थी...। पर ये डिगे नहीं...। क्योंकि आगे चमकता हुआ लक्ष्य था...। हौसले को सहारा बनाया...। दृढ़ संकल्प से आगे बढ़े...। दुश्वारियों को मात दी...। नतीजा...मेधा के उजाले से हार गया संसाधनों का अंधेरा। यूपी बोर्ड दसवीं और बारहवीं के इम्तिहान को अच्छे अंकों से पास करने वाले ऐसे छात्र-छात्राओं के हौसले को सलाम करती रिपोर्ट।
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फास्ट फूड का ठेला लगाने वाले की बिटिया की मेहनत रंग लाई
अवध कॉलेजिएट कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा रिया गुप्ता ने 86 फीसदी अंक लाकर अपने पिता की मेहतन को सार्थक कर दिया है। रिया के पिता कृष्ण सेवक गुप्ता फास्ट फूड का ठेला लगाते हैं। रिया के अनुसार अपने पिता को मेहनत करते देख उसमें अच्छा करने की प्रेरणा मिलती थी। उसका सपना आईएएस बनने का है। अपनी सफलता में रिया अपने माता-पिता व शिक्षकों को श्रेय देती हैं।
सफलता का मंत्र : सिर्फ पढ़ाई पर रहा ध्यान
टिप्स : खेलने के समय खेलो, पढ़ने के समय पढ़ो
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up board - फोटो : amar ujala
12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विशाल यादव के लिए सफलता का राह कांटों भरी रही। पिता विनोद यादव प्राइवेट नौकरी करते हैं। वेतन इतना नहीं की इस महंगाई के समय में बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। पिता की मेहनत और मां इंद्रावतीके सपनों को यूं ही मर जाने देने के बजाया विशाल ने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने के फैसला किया। वह ट्यूशन पढ़ाने लगा और साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। हालांकि वह 71 फीसदी अंकों से संतुष्ट नहीं। विशाल कहता है कि किताबें उपलब्ध कराने में शिक्षकों और दोस्तों ने काफी मदद की। अब मुझे टीचर बनकर लोगों को पढ़ाना है।
सफलता का मंत्र : मुश्किलों से डरो नहीं
टिप्स : थोड़ा पढ़ें पर ध्यान से पढ़ें।

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जिस स्कूल में पिता बस कंडक्टर, उसी में पढ़ती है मेधावी बिटिया
गणेशचंद यादव के लिए रविवार का दिन खास था। हो भी क्यों नहीं, जिस स्कूल में वह बस कंडक्टर हैं, उसी स्कूल में पढ़ने वाली उनकी बेटी शिवानी ने 80.33 प्रतिशत अंकों के साथ हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। इतने सक्षम नहीं कि बेटी की पढ़ाई की खर्च उठा सकें। हालांकि स्कूल प्रशासन ने 60 प्रतिशत फीस माफ कर दी थी। सहेलियों से पुरानी किताब लेकर शिवानी ने पढ़ाई की। शिवानी कहती हैं कि किताब खरीदना संभव नहीं था, क्योंकि पापा की कमाई इतनी नहीं थी। सहेलियों की किताबों से नोट्स बना लेती थी। वह सफलता का श्रेय माता-कल्पना यादव और पिता को देती है। शिवानी सीए बनना चाहती हैं।
सफलता का मंत्र : एकाग्रता के साथ पढ़ाई
टिप्स : सेल्फ स्टडी करें और जितना भी पढ़े एकाग्र होकर पढ़ें।
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पानी-बताशे बेचते हैं पिता
शुभम वर्मा ने 12वीं में 89.6 फीसदी अंक हासिल किए हैं। पिता केदार पानी-बताशे बेचते हैं। बेटे को पढ़ाने के लिए उन्होंने संसाधनों की कमी को कभी आड़े आने नहीं दिया। वहीं शुभम ने भी कभी माता-पिता को निराश नहीं किया। दिन-रात पढ़ाई की। घूमना-फिरना, टीवी और दोस्त, पढ़ाई के वक्त सबसे दूरी बनाए रखी। शुभम कहता है कि पापा ने बहन और मुझे पढ़ाने के लिए कड़ी धूप में भी दुकान लगाई। बारिश-आंधी में भी कभी घर में नहीं बैठे। अब मुझे उनका सपना पूरा करना है और आर्थिक सहारा बनना है। वह आईएएस बनना चाहते हैं।
सफलता का मंत्र : कड़ी मेहनत का विकल्प नहीं
टिप्स : ऊंचा सोचो, आगे बढ़ो
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सरकारी स्कूलों का मिथक तोड़ा, रखी लाज
आमतौर पर यह माना जाता है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे परीक्षा परिणाम में पिछड़ जाते हैं। राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज के इंटर के छात्र कुबेर नाथ ने इसको झुठला दिया है। कुबेर ने 89.85 प्रतिशत अंक अर्जित कर राजधानी की मेरिट में पांचवा स्थान प्राप्त किया है। पिता इंद्रभान बहराइच में खेती करते हैं। किराये पर कमरा लेकर पढ़ाई करने वाले कुबेर ने कभी स्कूल मिस नहीं किया। सेल्फ स्टडी पर ध्यान दिया और स्कूल के शिक्षकों से हर संभव मदद ली। वह आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहता है और इसके लिए वह तैयारी में जुट गया है।
सफलता का मंत्र : सुख-सुविधाओं की परवाह छोड़ी
टिप्स : सेल्फ स्टडी में भरोसा रखें और विस्तार से पढ़ें


 
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