इंदिरा गांधी
बात उन दिनों की है जब वह लोकसभा के सदस्य थे। पत्रकार रामनरेश त्रिपाठी ने संस्मरण लिखा है, ‘उन दिनों पंजाब में आतंकी घटनाओं का बोलबाला था। आए दिन कोई न कोई बड़ी घटना पंजाब में घट रही थी। लोगों की हत्याएं हो रही थीं। पर, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नीतियों और उनके चुप रहने से बहुगुणा बहुत खिन्न थे। वह चाहते थे कि इस तरह कोई बात न की जाए जिससे सिखों में अलगाववादी भावना फैले। एक दिन सदन में वह खुद को रोक नहीं सके।