सूर्य प्रताप शर्मा
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चारों तरफ फैली है ‘सूर्य’ की आभा
पैरा रेसल सूर्य प्रताप शर्मा 2017 के विश्व कप विजेता हैं। छह नेशनल गेम, चार में गोल्ड मेडल, सिल्वर और ब्रांज अभी तक उनके खाते में है और तैयारी एक बार और विश्व विजेता बनने की है। महज डेढ़ साल की उम्र में तेज बुखार और पोलियो ने दोनों पैरों की ताकत छीन ली, लेकिन नियति से लड़ने को ही जैसा उनका जन्म हुआ था। कहते हैं, जब तक बच्चा था, तब तक लोगों की उपेक्षा को समझ नहीं पाया था। मेरे स्कूल में जिस दिन कोई प्रोग्राम होता, मेरी छुट्टी कर दी जाती थी, क्योंकि मुझे संभालेगा कौन। कहीं भी मुझे एक ‘यूनीक पीस’ की तरह से देखा जाता था। एक वक्त था कि पढ़ाई छोड़ दी, पर सूर्य को तो चमकना ही था। एमबीए पूरा किया। ट्रेन के कोच में सैनिकों के साथ ने रेसलर बना दिया। केडी सिंह बाबू स्टेडियम में प्रेक्टिस शुरू हो गई। परिवार ने साथ दिया और दुनिया में रोशन किया नाम। फिलहाल तैयारी वर्ल्ड कप की है। उनकी इन तमाम उपलब्धियों के चलते प्रदेश सरकार आज उन्हें पुरस्कृत करेगी।
खुशी है कि बदल रही सोच
कल तक जो मुझे दयनीय भाव भरी नजर से देखते थे, आज वही मेरे आसपास, मेरे साथ हौसला बढ़ाते, सहयोग देते नजर आते हैं। खुशी है कि सोच बदल पाया हूं।