डॉ शाश्वत
- फोटो : अमर उजाला
कार्बन मोनोऑक्साइड, लेड से बढ़ेगा चिड़चिड़ापन
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. शाश्वत सक्सेना का कहना है कि स्मॉग दो तरह से असर डालता है। एक तत्काल और दूसरे का असर लंबे समय बाद दिखता है। स्मॉग में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, लेड और मरकरी सामान्य लोगों में चिड़चिड़ापन और भूलने की समस्या बढ़ाती है। इससे उनका अवसाद बढ़ने लगता है।
यही वजह है कि जिस वक्त स्मॉग रहता है, उस समय सड़क पर वाहन चलाते वक्त लोगों में छोटी-छोटी बातों पर ही चिड़चिड़ापन दिख जाता है। जिन लोगों में अभी किसी तरह की बीमारी नहीं है, वे स्मॉग में मौजूद विषैले तत्व की वजह से कुछ साल बाद अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। ओपीडी में इन दिनों जो पुराने मरीज आ रहे हैं उन्हें दवाओं की डोज बढ़ा कर देनी पड़ रही है।