लखनऊ के चौक से परिवार समेत लापता सराफ अमित अग्रवाल की गुमशुदगी और चार महीने बाद ओडीसा के पुरी स्थित एक होटल में उसकी गर्भवती पत्नी अंकिता, बेटी वाणी व बेटे दिव्यांश की हत्या का मामला छह साल बाद भी उलझा हुआ है। सीबीआई ने अमित को भले गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन लखनऊ पुलिस उसके लापता होने और पत्नी-बच्चों की हत्या के पीछे की साजिश का अब तक खुलासा नहीं कर सकी है। ऐसे कौन से हालात थे जो अमित को पत्नी-बच्चों के साथ लापता होना पड़ा? उसने प्रयागराज में गंगा किनारे अपनी कार में सुसाइड नोट लिखकर छोड़ा? पुरी के होटल में उसने पत्नी और बच्चों की हत्या क्यों की? इसके बाद वह कहां और किन हालातों में रहा? उसका आगे का इरादा क्या था? ऐसे तमाम सवालों के जवाब तलाशने के बजाए लखनऊ पुलिस शांत बैठ गई है। लेकिन अमित के साला व अंकिता के भाई अभिषेक ने हिम्मत नहीं हारी है। बहन व भांजे-भांजी की हत्या की वजह जानने के लिए वह स्थानीय पुलिस से लेकर सीबीआई तक के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही। हत्या के आरोपी बहनोई अमित से भी उसकी मुलाकात नहीं हो सकी है।
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अंकिता अग्रवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मेरी बहन और मासूमों का क्या कुसूर था, क्यों मार डाला उन्हें
अंकिता और उसकी बेटी वाणी व बेटे दिव्यांश की मौत से अमित और उसके परिवारीजन बेपरवाह हैं। अभिषेक ने बताया कि अमित की पारिवारिक जिंदगी बहुत खुशगवार थी। अंकिता पढ़ी-लिखी थी और जिम्मेदारी बखूबी निभा रही थी। सात साल की बेटी वाणी और चार साल का बेटा दिव्यांश रेडहिल स्कूल में पढ़ते थे। कर्ज से बचने के लिए अमित ने जो किया, वह जिंदगीभर का दर्द दे गया। उसका कहना था कि ‘आखिर क्या गलती थी मेरी बहन और मासूम बच्चों की जो अमित ने उन्हें मार डाला।’
इंदौर में पहचान बदलकर एक ठेकेदार की फर्म में कर रहा था नौकरी
पुरी में पत्नी-बच्चों की हत्या के बाद फरार अमित अग्रवाल मध्य प्रदेश के इंदौर में पहचान बदलकर रह रहा था। वह एक ठेकेदार की फर्म में नौकरी कर रहा था। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि अमित अपने परिवारीजनों के संपर्क में था और उनसे फोन पर बातचीत करता रहता था।
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अमित अग्रवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक में परिचित का घर छोड़ा, बिना सीसीटीवी कैमरे वाले होटल बुक कराए
ओडीसा के पुरी में सी-बीच स्थित जिस होटल जमींदार पैलेस में कमरा नंबर 307 बुक कराया था, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। अंकिता व उसके दोनों बच्चों की हत्या के बाद पुरी पहुंची लखनऊ पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आए थे। यह भी पता चला कि अमित कर्नाटक में किसी परिचित के घर पर रह रहा था। उसने अपना सिमकार्ड भी उक्त व्यक्ति के नाम पर ही लिया था। वह अपने परिवार के साथ नौ दिसंबर 2013 को जमींदार पैलेस होटल आया था। इससे पहले वह पुरी में ही होटल सागर तरंग में ठहरा हुआ था। होटल के रजिस्टर में उसने अपना मथुरा के वृंदावन का पता लिखवाया था। पुलिस सागर तरंग पहुंची तो वहां भी सीसीटीवी कैमरे नहीं मिले। अमित ने अपने परिचित का घर क्यों छोड़ा? वह होटल में क्यों रुका? उसने ऐसे होटल क्यों चुने जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे? इन सवालों में ही हत्याकांड की साजिश और वजह छिपी हुई है। अमित के साले अभिषेक का कहना है कि वह पत्नी-बच्चों की हत्या के इरादे से ही होटल आया था। उसने अंकिता और अपने बच्चों को जहरीला पदार्थ देकर बेसुध किया। इसके बाद गला कसकर उनकी हत्या कर दी और भाग गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
अमित पर थी दस करोड़ की बकायेदारी, पिता ने किया था हिसाब का वादा
अमित के पिता माधवराम अग्रवाल अक्तूबर 2013 को दीवाली से पहले लखनऊ आए थे। वह फिरंगी टोला स्थित अमित के घर पहुंचे तो चौक कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक दिनेश सिंह के साथ कई सराफा कारोबारी भी वहां आ गए। उनके साथ ठाकुरगंज के भुइयन देवी मंदिर के पास रहने वाला विभू याग्निक भी था। विभू ने अमित पर 450 ग्राम सोना हड़पने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में मुकदमा भी दायर किया था। सोने के बदले में अमित ने मथुरा के गुदड़ी बाजार स्थित केडी ज्वैलर्स के नाम से पर्ची दी थी। यह फर्म अमित अथवा उसके परिवारीजनों की ही बताई जा रही है। पुलिस के सामने ही माधवराम ने अलमारियां तोड़कर छानबीन कराई। अलमारियों से सराफा कारोबारियों के करीब दस करोड़ रुपये उधारी के कागजात मिले थे। लगभग इतनी ही रकम अमित को भी सराफा कारोबारियों से लेनी थी। माधवराम अग्रवाल ने 16 दिसंबर को दोबारा लखनऊ आकर पूरा हिसाब साफ करने का वादा किया था। हालांकि, 15 दिसंबर को ओडीसा से अंकिता व उसके बच्चों की हत्या और अमित के फरार होने की खबर आ गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
डब्बा कारोबार और सट्टेबाजी ने अमित को कर्ज में डुबोया
लखनऊ में सोने की चेन के सबसे बड़े सप्लायर अमित अग्रवाल डब्बा कारोबार और सट्टेबाजी में रकम डूबने व बीसी का पैसा फंसने से ही अमित कर्ज में दब गया था। लापता होने से कुछ महीने पहले ही उसने एक करोड़ रुपये की बीसी भी चालू की थी जिसका रुपया लोग दबा गए थे। पिता माधवराम ने चौक सराफा बाजार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को 45 लेनदारों की सूची सौंपी थी जिसके मुताबिक अमित को बाजार से करीब सात करोड़ रुपये लेने थे जबकि उसके ऊपर करीब नौ करोड़ की देनदारी थी। उसने राजधानी के अलावा कानपुर, गोरखपुर सहित कई जनपदों के व्यापारियों को सोना-चांदी दिया था।
घर छोड़ने से पहले डिलीट करा दी थी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग
अमित अग्रवाल ने भागने से पहले घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग डिलीट करा दी थी। पुलिस ने उसकी गुमशुदगी के बाद फिरंगी टोला स्थित घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई तब इस बात का खुलासा हुआ। सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल करने वाले अनिल यादव से पुलिस ने पूछताछ की तो उसने बताया कि 17 अगस्त 2013 को अमित अग्रवाल ने फोन करके बुलाया और सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग डिलीट करा दी। यही नहीं उसने परिवार के सदस्यों को भी अपने लापता होने के बारे में भनक नहीं लगने दी। 18 अगस्त 2013 की सुबह उसने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा और सबको लेकर घर से चला गया। दोपहर करीब दो बजे उसके साले अभिषेक ने फोन करके पूछा तो अमित ने बच्चों के स्कूल में होने की बात कहकर फोन काट दिया।
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अमित अग्रवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व गृहमंत्री से नजदीकियों के चलते रुकवाई जांच
अमित मूलरूप से मथुरा के वृंदावन का रहने वाला है। उसके पिता माधवराम अग्रवाल वहां के प्रतिष्ठित कारोबारी हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अमित के परिवारीजनों के पूर्व सरकार में गहरी पैठ थी। एक पूर्व गृहमंत्री से भी अमित के परिवार की नजदीकियां थीं। उन्होंने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए जांच रुकवा दी। वहीं अभिषेक का कहना है कि चौक पुलिस ने इस प्रकरण में शुरुआत से ही लापरवाही की। पुलिस ने उसे ढूंढने में रु्चि नहीं ली तो कारोबारियों ने उसका पता लगाया। कारोबारियों ने पुलिस अधिकारियों को उसकी लोकेशन के बारे में जानकारी भी दी। हालांकि पुलिस ने उस तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया।
यह था घटनाक्रम
18 अगस्त 2013 : चौक से सराफा अमित अग्रवाल, पत्नी अंकिता, बेटी वाणी और बेटा दिव्यांश लापता हुए।
20 अगस्त 2013 : प्रयागराज में खड़ी मिली अमित की कार, मिला सुसाइड नोट, साले ने लिखाई गुमशुदगी।
15 दिसंबर 2013 : ओडीसा के पुरी स्थित होटल में पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या कर भागा अमित।
16 दिसंबर 2013 : होटल के मैनेजर ने अमित के खिलाफ दर्ज कराई हत्या की एफआईआर।
14 अगस्त 2015 : ओडीसा सरकार की संस्तुति पर सीबीआई ने केस दर्ज कर शुरू की जांच।
27 मई 2018 : अमित को सीबीआई की कोलकाता यूनिट ने मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया।
ओडिशा में अमित की पत्नी-बच्चों की हत्या के बाद ही यहां दर्ज गुमशुदगी का मामला खत्म हो गया था। चूंकि, मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अमित को गिरफ्तार भी कर लिया है। इसलिए स्थानीय पुलिस का कोई लेना-देना नहीं है। अमित के खिलाफ अगर लखनऊ में कोई मुकदमा दर्ज है तो रिमांड बनवाकर उसे यहां लाने की कोशिश जरूर की जा सकती है। - पंकज कुमार सिंह, चौक इंस्पेक्टर