लखनऊ का रहमान खेड़ा अपने संरक्षित वन और हरियाली के लिए जाना जाता है। लखनऊ विवि के जूलॉजी विभाग व ओएनजीसी सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज ने यहां सर्वे कर रिपोर्ट में छह किस्म के क्षेत्रीय उल्लुओं की प्रचुर मौजूदगी की पुष्टि की है। इसे वन क्षेत्र की अच्छी सेहत का परिचायक बताया जा रहा है। साथ ही इन उल्लुओं के संरक्षण को इसे यथावत बनाए रखने की जरूरत भी बताई है।
विज्ञापन
2 of 6
बार्न आउल
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले पक्षी विज्ञान से संबंधित पुरानी पुस्तकों में इसी क्षेत्र में 11 किस्म के उल्लुओं की उपस्थिति दर्ज की गई है। मौजूदा अध्ययन में छह किस्मों की मौजूदगी बताई गई है। राजधानी से करीब 25 किमी दूर रहमान खेड़ा में मुख्यत: साल, टीक और सिल्वर लीफ के पेड़ हैं। यहां उल्लुओं की संख्या मापने के लिए जूलॉजिकल अध्ययनकर्ताओं प्रो. अमिता कनौजिया, दया शंकर शर्मा, अंकित सिन्हा, शिवांगी मिश्रा की टीम ने वर्ष के अलग-अलग समय में 100-100 मीटर की दूरी पर 15 बर्ड वॉचिंग पॉइंट बनाकर काम किया।
विज्ञापन
3 of 6
इंडियन इगल आउल
- फोटो : amar ujala
आमतौर पर सूरज ढलने के बाद इसे अंजाम दिया। वजह थी कि आमतौर पर उल्लुओं के लिए यह समय भोजन की खोज पर निकलने का होता है। नजर आए उल्लुओं की तस्वीरें ली गईं, जिससे उनकी प्रजातियों की आधिकारिक पुष्टि की जा सके।
4 of 6
जंगल आउलेट
- फोटो : अमर उजाला
सर्वे में मिली उल्लू की प्रजातियां
प्रचलित नाम वैज्ञानिक नाम
स्पॉटेड आउलेट एथने ब्रामा
जंगल आउलेट ग्लाउसिडियम रेडियटम
बार्न आउल टायटो ऐल्बा
मोटल्ड वुड आउल स्ट्रिक्स ओसेल्लाटा
इंडियन स्पॉटेड आउल ओटस बक्कामोएना
इंडियन इगल आउल बुबो बेंगालेंसिस
विज्ञापन
5 of 6
स्पॉटेड आउलेट
- फोटो : अमर उजाला
इन पक्षियों की मौजूदगी के हमारे लिए मायने
लखनऊ जिले में केवल 4.6 प्रतिशत भूमि पर जंगल बचा है, जबकि प्रदेश का औसत सात है। लखनऊ में मौजूद जंगल में रहमान खेड़ा प्रमुख है। इसका सुरक्षित रहना, राजधानी की आबोहवा और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। यहां उल्लुआें की व्यापक उपस्थिति संकेत है कि कम से कम रहमान खेड़ा में अभी स्थितियां ठीक हैं। इन्हें ऐसा ही बनाए रखा जाना चाहिए, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ानी चाहिए ताकि पक्षियों के लिए आवास बढ़ें।
- उल्लू अलग-अलग मौसमों में भी नजर आए। यानी कहा जा सकता है कि रहमान खेड़ा उनके लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध करवा रहा है।
- दुधवा नेशनल पार्क में भी उल्लुओं की 10 किस्में मिली हैं, हालांकि वह 490.3 वर्ग किमी में फैला है। जबकि रहमान खेड़ा का जंगल केवल कुछ हेक्टेयर क्षेत्र में है।