श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर राजधानी कान्हा के रंग में रंगी नजर आई। घरों, मंदिरों से लेकर थानों तक जन्माष्टमी का उल्लास गूंजा। जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का उल्लास और बढ़ गया। आगे तस्वीरों में देखें छटा...
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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर कान्हा के रंग में रंगी राजधानी।
- फोटो : अमर उजाला
कहीं फूलों के बंगले में विराजे लड्डू गोपाल, कहीं रोशनी और संगीत के बीच जीवंत होती डिजिटल झांकियां, तो कहीं राधा-कृष्ण बने बच्चों की मासूम अदाएं... श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर राजधानी लखनऊ भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर नजर आई। मंदिरों, धार्मिक स्थलों और थानों तक में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम रही। भजन-कीर्तन, आकर्षक श्रृंगार, 56 भोग, डिजिटल झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे शहर को कान्हा की भक्ति में रंग दिया।
डिजिटल झांकी में जीवंत हुआ गोकुल का मेला
अमीनाबाद रोड स्थित न्यू गणेशगंज में मित्तल परिवार की ओर से चार से नौ सितंबर तक छह दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं डिजिटल मूविंग झांकियों का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल भ्रमण का प्रसंग जीवंत किया गया। बाल सखाओं के साथ निकले कान्हा मेले की रौनक देखते, दुकानों पर खरीदारी करते, मिठाइयों का आनंद लेते और झूलों तथा खेल-तमाशों के बीच गोकुल भ्रमण का आनंद उठाते दिखाई दिए।
झांकी संयोजक अनुपम मित्तल ने बताया कि लाइट एंड साउंड इफेक्ट और स्वचालित मूर्तियों के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत बनाया गया है। सावन में झूला झूलते राधा-कृष्ण, बाबा अमरनाथ के दर्शन, हनुमान जी के हृदय में राम-सीता के दर्शन, मदारी के खेल, तुलसीदास और माखन चोरी के बाद कन्हैया को दौड़ाती मां यशोदा की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। करीब 20 फीट ऊंचे शिवलिंग से गंगा अवतरण का दृश्य विशेष सेल्फी कार्नर के रूप में लोगों को खूब लुभा रहा है। फूलों, झालरों, झूमरों और रंग-बिरंगी एलईडी रोशनी से सजा परिसर उत्सव की भव्यता को और बढ़ा रहा है।
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फूल बंगले में सजे श्याम, 56 भोग का लगा प्रसाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फूल बंगले में सजे श्याम, 56 भोग का लगा प्रसाद
उधर, बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री श्याम मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर को देशी-विदेशी फूलों से भव्य फूल बंगला का स्वरूप दिया गया, जबकि रंग-बिरंगी इलेक्ट्रॉनिक झालरों और गुब्बारों से सजावट की गई। भगवान को 56 भोग अर्पित किया गया और जन्मोत्सव की खुशी में 101 किलो मेवा मिल्क केक काटा गया।
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मेघों की गर्जना के बीच कान्हा जन्म की अनुभूति
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेघों की गर्जना के बीच कान्हा जन्म की अनुभूति
मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म के अवसर पर मेघों की गर्जना और वर्षा जैसा मनमोहक वातावरण तैयार किया गया। राधा-कृष्ण की मनमोहक छवि को नृत्य के माध्यम से भी प्रस्तुत किया गया। विधायक डॉ. नीरज बोरा ने भी श्री श्याम मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का उल्लास और बढ़ गया।
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थाने में भी सजी कान्हा की झांकी
- फोटो : अमर उजाला
थाने में भी सजी कान्हा की झांकी
जन्माष्टमी की रौनक राजधानी के दूसरे इलाकों में भी देखने को मिली। नाका हिंडोला थाने में विशेष सजावट के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। यहां हवालात को खोलकर श्रीकृष्ण की झांकी सजाई गई, जो आम लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रही।
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राधा-कृष्ण ने बिखेरा बचपन का रंग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नन्हे राधा-कृष्ण ने बिखेरा बचपन का रंग
आलमबाग के रामप्रसाद खेड़ा स्थित खाटू श्याम मंदिर में भी भगवान के दरबार को सजाया गया। राधा-कृष्ण की वेशभूषा में पहुंचे छोटे बच्चों ने उत्सव में अलग ही रंग भर दिया। बच्चों के लिए आयोजित नृत्य प्रतियोगिता में भक्ति और प्रतिभा का सुंदर संगम दिखाई दिया।
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इस्कॉन में कीर्तन, कोतवाली के बाहर मेले की रौनक
- फोटो : अमर उजाला
इस्कॉन में कीर्तन, कोतवाली के बाहर मेले की रौनक
बांसमंडी चौराहा स्थित इस्कॉन मंदिर में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन के साथ भजन-कीर्तन में भाग लिया। वहीं आलमबाग कोतवाली स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर में भी विशेष सजावट की गई। कोतवाली के बाहर लगे मेले में बच्चों और परिवारों की चहल-पहल रही, जबकि परिसर में आयोजित धार्मिक गतिविधियों ने जन्माष्टमी के उत्सव को यादगार बना दिया।
भक्ति, उत्सव और उमंग में डूबी रही राजधानी
- फोटो : अमर उजाला
भक्ति, उत्सव और उमंग में डूबी रही राजधानी
कुल मिलाकर, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लखनऊ में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई दिया। कहीं डिजिटल तकनीक से पौराणिक कथाएं साकार हुईं, कहीं फूलों और रोशनी से सजे मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ी और कहीं नन्हे राधा-कृष्ण ने उत्सव को जीवंत बना दिया। आधी रात कान्हा के जन्म की प्रतीक्षा में पूरी राजधानी एक ही भाव में डूबी नजर आई- भक्ति, उल्लास और नंदलाल के आगमन की खुशी।