फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आदमखोर मादा तेंदुआ पिंजड़े में फंसी, देखें पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें

Fri, 28 Jul 2017 05:51 PM IST
बहराइच/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 4
तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीण उसे देखने पहुंचे
रामगांव क्षेत्र में सरयू के कछार में छह माह से आतंक का पर्याय बनी मादा तेंदुआ गुरुवार रात आजादनगर गांव के निकट पिंजरे में फंस गई। उसे लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया है। पिंजरे में फंसी मादा तेंदुआ ने अब तक दो बच्चों के साथ १६ से अधिक मवेशियों को निवाला बनाया है। तेंदुए के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि तेंदुए के शावक अभी पिंजरे में नहीं कैद हो सके हैं। उन्हे पकड़ने के लिए वन विभाग की कांबिंग जारी है।
विज्ञापन

2 of 4
तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीण उसे देखने पहुंचे
बहराइच वन प्रभाग के रामगांव क्षेत्र में मादा तेंदुए का आतंक बीते छह माह से था। पांच दिन पूर्व मुकेरिया गांव में पिता के साथ सो रहे रमेश पाल के आठ वर्षीय पुत्र संजय कुमार को तेंदुआ रात में सोते समय उठा ले गया था। घर से १०० मीटर दूर स्थित बाग में संजय का क्षतविक्षत शव मिला था। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया था। इसके बाद वन क्षेत्राधिकारी रुस्तम परवेज की अगुवाई में दो टीमें गठित की गई थीं। कांबिग में सहयोग के लिए लखनऊ चिड़ियाघर के चिकित्सक डा. आसिफ और डा. बृजेंद्र को बुलाया गया था। साथ ही आजादनगर, मुकेरिया और बसौनामाफी गांव के निकट चार पिंजरे लगाए गए थे।
विज्ञापन

3 of 4
जंगल में लगाया गया पिंजड़ा
वन क्षेत्राधिकारी रुस्तम परवेज ने बताया कि तीन दिन से आजादनगर और बसौनामाफी के निकट तेंदुए का मूवमेंट था। इस पर उसे पिंजरे की ओर भेजने के लिए कांबिंग कर दबाव बनाया जा रहा था। गुरुवार रात ०२:३० बजे के आसपास आजादनगर गांव की ओर शिकार के लिए बढ़ रहा तेंदुआ पिंजरे में फंस गया। वन क्षेत्राधिकारी के मुताबिक पिंजरे में फंसी तेंदुआ मादा है। उम्र दो साल से अधिक है। उन्होने कहा कि तेंदुए को लखनऊ चिड़ियाघर सुरक्षा के बीच भेज दिया गया है। 
विज्ञापन

4 of 4
पिंजड़े में कैद आदमखोर तेंदुआ
वन क्षेत्राधिकारी रुस्तम परवेज ने बताया कि कतर्नियाघाट सेंचुरी की दूरी तो लगभग ९० किलोमीटर के आसपास है। जहां से भटककर वह यहां आयी थी। सरसू के कछार में मुकेरिया गांव से दो किलोमीटर की दूरी पर शिकाकाई का जंगल है। पास में नाला बहता है। यह स्थान तेंदुए के प्राकृतिक वास जैसा है। शायद इसी लिए मादा तेंदुआ ने शिकाकाई के जंगल को प्रवास स्थल बना लिया था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें